हरियाणा सरकार द्वारा मजदूरों को 5-5 किलो के गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। कई इलाकों में मजदूरों को न तो इस योजना की सही जानकारी मिल पा रही है और न ही समय पर सिलेंडर उपलब्ध हो पा रहे हैं। अशोक नगर निवासी धीर काली ने बताया कि पिछले 15 दिनों से उन्हें छोटा गैस सिलेंडर नहीं मिल पाया है, जिसके चलते उन्हें मजबूरी में फिर से चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर समय पर सिलेंडर मिल जाता, तो उन्हें इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। स्थिति की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि 2 किलो के छोटे सिलेंडर की गैस, जिसकी कीमत सामान्य तौर पर करीब 60 रुपये प्रति किलो होनी चाहिए, वह अनौपचारिक बाजार में 300 रुपये प्रति किलो तक बेची जा रही है। इससे साफ है कि सप्लाई की कमी और निगरानी के अभाव का फायदा उठाकर मुनाफाखोरी की जा रही है।