हरियाणा के सरकारी विभागों के आइडीएफसी फर्स्ट बैंक में जमा पैसे में धोखाधड़ी इस तरह से की गई थी कि आसानी से कोई पता न लगा सके लेकिन जांच में कड़ियां खुलतीं जा रही हैं। सरकारी पैसे को सीधे इस्तेमाल न करने के बजाय आगे कुछ और खातों में डाल कर निकासी की गई। करीब 2000 ऐसे खाते हैं जिनमें पैसे का लेन देन हुआ। यह खाते या तो फर्जी कंपनियों के थे या निजी। जिन भी खातों में इस धोखाधड़ी के पैसे से आगे से आगे लेनदेन हुआ, उन्हें सीज कर दिया गया है। विजिलेंस ने बुधवार को चंडीगढ़ की सेक्टर-32 स्थित बैंक शाखा में जाकर जांच की। अब तक 152 करोड़ रुपये की संदिग्ध राशि का पता चला है। इस राशि पर होल्ड लगा लिया गया है। इस राशि से जुड़े बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। ये खाते पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, बंगलूरू और गुजरात के खाताधारकों के हैं। सूत्रों के अनुसार कई नामचीन सर्राफा कारोबारियों के खाते भी जांच के दायरे में है। उनके 100 से अधिक खाते फ्रीज हुए हैं, जिनमें से 60 खाते तो अकेले चंडीगढ़ के स्वर्ण कारोबारियों के हैं। खाते सीज होने की शिकायतें चंडीगढ़ पुलिस के पास पहुंचीं। चंडीगढ़ के डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा ने इस संबंध में हरियाणा पुलिस को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि चंडीगढ़ से जुड़े इन सभी मामलों की जांच हरियाणा पुलिस करे क्योंकि शिकायत वहीं दर्ज हुई है।