राष्ट्रीय राजमार्ग - 44 से करीब 12 किलोमीटर दूर शाहाबाद-लाडवा सड़क पर स्थित है गांव बीड़ सुजरा। करीब 2000 लोगों की आबादी वाले इस गांव के खेत अनाज कम फूल के रूप में सोना ज्यादा उगलते हैं। छोटी जोत के किसान होने के कारण यहां परंपरागत खेती की जगह फूलों की खेती इनकी प्राथमिकता बन गई है। फूलों की खेती ने इस गांव के लोगों की तकदीर बदल दी है। बीते 40 से 50 साल में यह स्थान दिल्ली, पंजाब, देहरादून और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खरीदारों और फूल बेचने वालों दोनों के लिए प्रमुख केंद्र बन गया है। यह गांव हरियाणा का एकमात्र गांव है जहां फूलों का बाजार सजता है। फूलों की खेती करने वालों गांव के प्रमुख किसानों में शामिल जोगिंदर बताते हैं कि वर्ष 1914 में दिल्ली से विस्थापित होकर आए किसान बीड़ सुजरा, पीपली, सुंदरपुर और बीड़ गांवों में बस गए। शुरुआत में जीविकोपार्जन के लिए परंपरागत खेती ही करते थे। करीब 50 बरस पहले एक खेत में सर्दियों के मौसम में गेंदे के कुछ फूल खिल गए।