दिल्ली का एक बड़ा मशहूर किस्सा है। एक कार्यक्रेम में लिजेंड्री लिरिसिस्ट गुलजार शिरकत करने पहुंचे। गुलजार के स्टेज पर पहुंचते ही पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। गुलजार ने अभिवादन स्वीकार करते हुए सबको बैठने को कहा और खुद भी बैठ गए। इतने उनके हाथ में माइक आया, तो अचानक अपने लहजे में बोल उठे कुछ उलझ सा गया है। लोगों ने इसपर तालियां पीटनी शुरु कर दी। तालियों का शोर खत्म हुआ तो गुलजार बोल उठे कि भाई में माइक के तार की बात कर रहा था। कुछ ऐसी है गुलजार साहब की शख्सियत औऱ उनका राबो रुआब। पर आपको पता है कि आखिर गुलजार किसे अपना गुरु मानते हैं, और किसने उन्हें एक बार भरी महफिल में डांट दिया । देखिए गुलजार की कहानी उन्हीं की जुबानी हमारी इस खास रिपोर्ट में।