नूंह जिले के अड़बर गांव की एक हजार से अधिक घरों वाली बस्ती में पिछले करीब आठ साल से पीने के पानी की एक बूंद भी नसीब नहीं हुई। जिन टोंटियों से कभी बच्चों की किलकारियां और औरतों की चहल-पहल सुनाई देती थी, आज वहां सिर्फ सूखी पाइपलाइन और सरकारी सिस्टम की खामोशी पसरी हुई है। मजबूरी ऐसी कि ग्रामीणों को पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है, और हर महीने लाखों रुपये सिर्फ प्यास बुझाने में खर्च हो रहे हैं।