गौतम बुद्ध नगर जिले ने तैराकी में बीते दो दशकों से उत्तर प्रदेश में दबदबा बनाए रखा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह सफलता पूरी तरह निजी कोचिंग, स्कूलों और खिलाड़ियों के व्यक्तिगत संघर्ष के दम पर खड़ी है। जिले में आज तक एक भी सरकारी सार्वजनिक स्विमिंग पूल विकसित नहीं किया गया। नतीजा यह है कि 500 से अधिक सक्रिय तैराक, जिनमें राष्ट्रीय पदकधारी भी शामिल हैं, निजी स्कूलों और अकादमियों की दया पर अभ्यास करने को मजबूर हैं। सबसे गंभीर स्थिति सर्दियों में सामने आती है, जब अधिकांश निजी पूल या तो बंद हो जाते हैं या अभ्यास का समय बेहद सीमित कर दिया जाता है। इससे खिलाड़ियों की ट्रेनिंग चक्र टूट जाती है और प्रदर्शन पर सीधा असर पड़ता है।