गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान एवं मानसिक स्वास्थ्य विभाग में न्यूरो एंड बायोफीडबैक ट्रेनिंग एवं सर्टिफिकेशन प्रोग्राम का शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉ. आनंद प्रताप सिंह ने कहा कि यह प्रशिक्षण केवल तकनीकी अधिगम का माध्यम नहीं, बल्कि मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली, आत्म-नियंत्रण और मानसिक सामंजस्य को गहराई से समझने का एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है। डॉ. रूडिगर शेलनबर्ग ने न्यूरोफीडबैक और बायोफीडबैक की कार्यप्रणाली पर बताया कि ये तकनीकें मस्तिष्क और शरीर की गतिविधियों के बीच सूक्ष्म संबंधों को समझने और नियंत्रित करने का माध्यम हैं। बायोफीडबैक तकनीक शरीर की जैविक प्रक्रियाओं जैसे हृदय गति, श्वसन और त्वचा की विद्युत प्रतिक्रिया को मॉनिटर कर आत्म-नियंत्रण को प्रोत्साहित करती है। इसका उपयोग न केवल मानसिक विकारों जैसे तनाव, चिंता, अवसाद और एडीएचडी में किया जा सकता है, बल्कि यह समग्र मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को भी सशक्त रूप से बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही हैं। स्केलनबर्ग इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन जर्मनी के निदेशक डॉ राजिंदर धमीजा ने बताया कि न्यूरो एंड बायोफीडबैक थेरेपी हेल्दी ब्रेन के लिए एक आवश्यक एवं मिल का पत्थर तकनीकी साबित हो सकती है। डॉ राजीव वाष्र्णेय ने न्यूरो एंड बायोफीडबैक थेरेपी को टी एम एस के साथ जोड़ कर उपचार पद्धति को विकसित करने पर जोर दिया। इस मौके पर कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह,कुलसचिव डॉ विश्वास त्रिपाठी, प्रो बंदना पाण्डेय,जिम्स के निदेशक डॉ ब्रिगेडियर राकेश गुप्ता, डॉ विभा शर्मा आदि शामिल रहे।