विश्व थेरवाद बौद्ध केंद्र की ओर से सोमवार को अश्विन पूर्णिमा के महत्व और थेरवाद बौद्ध धर्म में भिक्षुओं के वर्षावास विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में अश्विन पूर्णिमा के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के साथ ही थेरवाद बौद्ध परंपरा में वर्षावास की भूमिका पर चर्चा की जा रही है। वर्षावास बौद्ध भिक्षुओं की एक महत्वपूर्ण परंपरा है, जिसमें वे वर्षा ऋतु के दौरान एक स्थान पर रहकर साधना, अध्ययन और आध्यात्मिक गतिविधियों में समय बिताते हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य बौद्ध धर्म की परंपराओं, शिक्षाओं और सांस्कृतिक विरासत के महत्व को समझना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विचारों का आदान-प्रदान करना है। सम्मेलन में भारत सहित भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, ब्रिटेन, अमेरिका, वियतनाम और नीदरलैंड जैसे देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।