भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जनजाति (एसटी) मोर्चा ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कोंडागांव के पुराना बस स्टैंड चौक में उनका पुतला दहन किया गया। इस दौरान भाजपा एसटी मोर्चा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने ममता बनर्जी के बयान और रवैये की कड़ी आलोचना की।
भाजपा एसटी मोर्चा के जिलाध्यक्ष गोरखनाथ बघेल ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संथाल समाज के बीच जाने से रोकना गलत है। यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान है। बघेल ने ममता बनर्जी के खिलाफ एसटी-एससी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने इस मामले में तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। भाजपा जिलाध्यक्ष कोंडागांव सेवक राम नेताम ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं आदिवासी समाज से आती हैं। अपने समाज के बीच जाना उनका अधिकार और सम्मान का विषय है। उन्हें संथाल समाज के कार्यक्रम में जाने से रोकना आदिवासी समाज की भावनाओं को आहत करने वाला कदम है।
आदिवासी समाज का अपमान
सेवक राम नेताम ने इस प्रकार की राजनीति को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि इससे आदिवासी समाज का अपमान होता है। नेताम ने सवाल उठाया कि ममता बनर्जी को किस बात का डर है। क्या उन्हें भय है कि आदिवासी समाज सच्चाई को समझकर उनके शासन की वास्तविकता को पहचान लेगा।
व्यापक आंदोलन की चेतावनी
भाजपा नेताओं ने कहा कि आदिवासी समाज देश की आत्मा है। उनके सम्मान और अधिकारों के साथ ऐसा व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की घटनाएं दोहराई जाती हैं। भाजपा और आदिवासी समाज व्यापक आंदोलन करने को मजबूर होगा।