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जगदलपुर: स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर डॉक्टरों का अनोखा प्रदर्शन, मां दंतेश्वरी को सौंपी अर्जी

Wed, 12 Aug 2026 12:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर

जगदलपुर स्थित मेडिकल कॉलेज डिमरापाल के इंटर्न चिकित्सक स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर पिछले आठ दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। सरकार से लगातार मांग रखने के बावजूद समाधान नहीं होने पर अब डॉक्टरों ने अनोखे तरीके से अपनी आवाज उठाई है। मंगलवार शाम इंटर्न चिकित्सकों ने शहर में पैदल मार्च निकाला और बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के मंदिर पहुंचकर अपनी मांगों से जुड़ी अर्जी देवी को अर्पित की।

इंटर्न चिकित्सकों की प्रमुख मांग मासिक स्टाइपेंड को 15,900 रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने की है। चिकित्सकों का कहना है कि इस संबंध में सरकार को पत्र और कई बार निवेदन किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। मांग पूरी नहीं होने के बाद इंटर्न डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। मेडिकल कॉलेज परिसर में चिकित्सक धरने पर बैठे हैं और तालपत्री लगाकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ में इंटर्न और पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों को दूसरे राज्यों की तुलना में काफी कम स्टाइपेंड मिल रहा है।

इंटर्न डॉक्टरों के साथ पीजी रेजिडेंट भी स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग उठा रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार छत्तीसगढ़ में पीजी प्रथम वर्ष का स्टाइपेंड करीब 67,500 रुपये है, जिसे वे अन्य राज्यों की तुलना में कम बता रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे चिकित्सकों का कहना है कि लंबे समय तक प्रशिक्षण और अस्पतालों में जिम्मेदारी के साथ सेवाएं देने वाले इंटर्न और पीजी डॉक्टरों को उनके काम के अनुरूप सम्मानजनक स्टाइपेंड मिलना चाहिए। उन्होंने समय पर स्टाइपेंड भुगतान और चिकित्सकों के हित में उचित व्यवस्था की मांग की है।

हड़ताल के आठवें दिन मंगलवार शाम इंटर्न चिकित्सकों ने अपनी मांगों के समर्थन में पैदल मार्च निकाला। मार्च चांदनी चौक से शुरू होकर शहीद पार्क, पुराना बस स्टैंड, मेन रोड, गोल बाजार और सिरहासार होते हुए मां दंतेश्वरी मंदिर पहुंचा। मंदिर पहुंचने के बाद चिकित्सकों ने मां दंतेश्वरी को अपनी मांगों और समस्याओं से संबंधित पत्र सौंपा। डॉक्टरों ने प्रार्थना करते हुए सरकार तक उनकी आवाज पहुंचने और जल्द मांग पूरी होने की कामना की।

इंटर्न चिकित्सकों का कहना है कि वे अपनी मांग को लेकर पहले ही शासन-प्रशासन के समक्ष पक्ष रख चुके हैं। इसके बावजूद समाधान नहीं होने के कारण आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि जब तक स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

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