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कोंडागांव में कांग्रेस का सरकार पर धान खरीदी नीति को लेकर हमला, 28 फरवरी तक तिथि बढ़ाने की मांग

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर कांग्रेस नेताओं ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर तीखे आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सरकार की धान खरीदी नीति किसान विरोधी है और जानबूझकर किसानों को उनकी उपज बेचने में परेशान किया जा रहा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चुनावी वादों के बावजूद सरकार जमीनी स्तर पर उन्हें पूरा करने में विफल रही है। व्यवस्था में भारी अव्यवस्थाएं कांग्रेस नेताओं ने जिले के लगभग 10 से 12 धान खरीदी केंद्रों का निरीक्षण किया। वहां उन्हें भारी अव्यवस्थाएं मिलीं। कई केंद्रों में किसानों को टोकन नहीं मिल पा रहे थे। जहां टोकन जारी हुए भी, वहां धान का उठाव बहुत धीमी गति से हो रहा था। इससे किसानों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। किसानों पर कार्रवाई की निंदा कांग्रेस ने केशकाल में चक्का जाम के बाद दो किसानों को नोटिस जारी करने और उनके बैंक खाते सीज करने की कार्रवाई की कड़ी निंदा की। नेताओं ने इसे "अंग्रेजी शासनकाल जैसी दमनकारी कार्रवाई" बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन करना किसानों का अधिकार है, न कि उन्हें दंडित करना। प्रमुख मांगें और आरोप कांग्रेस की मुख्य मांग है कि धान खरीदी की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 28 फरवरी किया जाए। इससे सभी किसान बिना दबाव के अपनी फसल बेच सकेंगे। इसके अलावा, वन अधिकार पट्टा धारकों, स्वतंत्रता सेनानियों और पूर्व सैनिकों की भूमि से धान खरीदी न होने का मुद्दा भी उठाया गया। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि धान की तौल में प्रति क्विंटल लगभग 1700 से 1800 ग्राम अतिरिक्त धान लिया जा रहा है। उन्होंने इसे "खुली लूट" करार दिया। आंदोलन की चेतावनी कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने धान खरीदी नीति में तत्काल सुधार नहीं किया, तो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस राजधानी रायपुर में बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएगी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसानों के हक और सम्मान की है, जिसे किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा।

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