विजयादशमी के पावन अवसर पर नगर में परंपरागत उत्साह और श्रद्धा के साथ दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। नगर के विभिन्न पूजा समितियों द्वारा शोभायात्रा के रूप में मूर्तियों का विसर्जन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने आंखों में आस्था और भक्ति के साथ भाग लिया। उत्सव की मुख्य आकर्षण नगर के हाई स्कूल मैदान में आयोजित विशाल रावण दहन कार्यक्रम रहा। इस दौरान भव्य आतिशबाजी, भजन संध्या और धार्मिक प्रवचनों के बीच महामंडलेश्वर स्वामी परमात्मानंद गिरी महाराज की उपस्थिति ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की। 65 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन कर असत्य पर सत्य की विजय का संदेश दिया गया। स्वामी परमात्मानंद गिरी ने अपने संबोधन में कहा कि दशहरा केवल रावण के पुतले को जलाने का पर्व नहीं है, बल्कि हमें अपने अंदर के अहंकार, क्रोध, लोभ रूपी रावण को भी पराजित करना चाहिए। उन्होंने हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए कहा कि इसका उद्देश्य संप्रदाय विशेष का वर्चस्व नहीं, बल्कि धर्म और संस्कृति की रक्षा करना है। कार्यक्रम के संयोजक नगर पालिका अध्यक्ष रमन अग्रवाल ने कहा कि विगत कई वर्षों से यह आयोजन सागर मोती फाउंडेशन के तत्वावधान में सफलतापूर्वक संपन्न हो रहा है। उन्होंने भारी जनसमूह की उपस्थिति को ऐतिहासिक बताते हुए सभी नगरवासियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक समरसता और सद्भावना का संदेश देने के लिए 20 से अधिक समाज के प्रमुखों का साल और श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया। यह पहल समाज को एकजुट रखने और सांस्कृतिक विरासत को संजोने का प्रतीक बनी।