पौराणिक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक बस्तर दशहरा महोत्सव धूमधाम से मनाने की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। 12 अक्टूबर को कोण्डागांव के चौपाटी मैदान से सजे-धजे परंपरागत समूहों की टोली को बस्तर दशहरा के लिए आत्मीय विदाई दी गई। इस अवसर पर कोण्डागांव की विधायक और बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लता उसेंडी ने सभी टोली के सदस्यों को शुभकामनाएं दीं और बस्तर दशहरा के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। बस्तर दशहरा महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम भी है। इस महोत्सव के दौरान कला, संस्कृति और परंपरा का अद्वितीय मेल देखने को मिलता है, जो स्थानीय समुदाय और पर्यटकों को आकर्षित करता है।