दीपावली का त्यौहार करीब आते ही बाजार रोशनी और सजावट से गुलजार हो गया है। कुम्हार परिवार पूरे उत्साह के साथ मिट्टी के दिये और बर्तन तैयार करने में जुटे हैं। इस बार दियों की मांग बढ़ने से उनके चेहरों पर खुशी साफ झलक रही है। कुम्हारों का कहना है कि पहले आसानी से मिट्टी मिल जाती थी, लेकिन अब कॉलोनियों के विस्तार से उन्हें दूर-दराज से मिट्टी मंगवानी पड़ रही है। शासन की ओर से दिए गए चाक की मदद से वे दिये के साथ-साथ अन्य बर्तन भी बना रहे हैं। हुकुमचंद चक्रधारी ने बताया कि दीपावली सीजन में 50–60 हजार तक दिये बिक जाते हैं। चायनीज सामान की मौजूदगी के बावजूद भी पूजा-पाठ के लिए लोग मिट्टी के दिये ही पसंद करते हैं। पूरा परिवार रोजाना 500 से 700 दिये बनाकर बाजार में बेच रहा है। बचपन से ही मिट्टी से जुड़ी कला सीख रहे बच्चों तक में इस बार उत्साह है। प्रिया चक्रधारी नाम की 10 साल की बच्ची ने बताया कि उसने हाल ही में दिये बनाना सीखा है और अब पिता के साथ इस काम में हाथ बंटा रही है। कुम्हारों को भरोसा है कि इस बार उनकी दीपावली दियों की चमक के साथ दोगुनी खुशियां लेकर आएगी।