यह एक पारंपरिक और सांस्कृतिक आयोजन है, जिसमें महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए वृक्ष में रक्षा सूत्र बांधकर पूजा करती हैं। यह आयोजन विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग तरीकों से मनाया जा सकता है, लेकिन इसका उद्देश्य एक ही होता है - पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। महिलाएं वृक्ष को पवित्र मानकर उसकी पूजा करती हैं और रक्षा सूत्र बांधती हैं।इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करना है। यह आयोजन विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है और इसका सांस्कृतिक महत्व है। यह आयोजन पारिवारिक सुख-समृद्धि और पति-पत्नी के प्रेम को बढ़ावा देता है। यह आयोजन हमारी सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है और इसका महत्व समझना आवश्यक है। इस प्रकार के आयोजनों से हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं के बारे में जानने और समझने का अवसर मिलता है। सुबह से ही शहर के सीतामणी मुख्य मार्ग, सप्तदेव मंदिर, पुराना बस स्टैंड,टीपी नगर के अलावा कई जगहों पर महिलाएं सज धज सिंगार करके पूजा पाठ करती नजर आई जहां काफी संख्या में महिलाएं पेड़ के नीचे पूजा कर रही थी। सीतामणी निवासी राम मंदिर के पुजारी ने बताया कि हर साल इस पूजा के लिए महिलाएं मंदिर पहुंचती है जिनके लिए विशेष पूजा अर्चना की जाती है और 108 बार रक्षा सूत्र घूम कर बांधा जाता है वह अपनी पति के दीर्घायु के लिए यह पूजा पाठ की जाती है। सीतामणी निवासी ईश्वरी यादव ने बताया कि उसकी शादी को 9 साल हो गया और एक छोटा 6 साल का बेटा चीकू है। शादी के होने के बाद सही वह पूजा पाठ करते आ रही है और इस पूजा को करने से उसे आत्म शांति मिलता है और अपने पति की दीर्घायु के लिए कामना करती है। भिलाई खुर्द निवासी पूजा ने बताया कि इस पूजा के लिए पिछले 1 साल से इंतजार रहता है।जहा आज सुबह से ही पति की दीर्घायु के लिए विशेष पूजा अर्चना करती है जहां एक दिन पहले ही हाथों में मेहंदी और पूजा सामग्री एकत्रित कर लेती है। दीपा ने बताया कि पिछले कई सालों से इस पूजा को करते आ रही है शादी से पहले भी बहुत लोग अपने पति की दीर्घायु के लिए इस पूजा को करते आ रहे हैं। कोरबा शहर के अलावा उपनगरी क्षेत्र का कुसमुंडा, दीपका,एसईसीएल कॉलोनी इलाकों में महिलाएं पूजा करते नजर आए जहां दीपिका के शिव मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की गई। एसईसीएल प्रगति नगर कॉलोनी इस पूजा अर्चना के लिए विशेष तैयारी की गई थी जहां पेड़ के नीचे सजाया गया था।