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Korba:कंनकी में मिला रसल वाइपर सांप, प्रेशर कुकर की तरह करता है आवाज

Digvijay Singh Updated Sat, 31 May 2025 02:14 PM IST

कोरबा जिले के कनकी ग्राम में शुक्रवार रात 12 बजे एक रसेल वाइपर (Daboia russelii) का सफल रेस्क्यू किया गया। वन विभाग और नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी की टीम ने मिलकर इस अत्यंत विषैले साँप को सुरक्षित रूप से पकड़कर वन क्षेत्र में छोड़ दिया। ग्रामवासियों की सतर्कता और वन विभाग की सजगता के चलते रेस्क्यू अभियान सफल रहा। रेस्क्यू टीम ने आवश्यक वैज्ञानिक प्रोटोकॉल और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए साँप को शांतिपूर्वक पकड़ा। रेस्क्यू के दौरान ग्रामीणों को साँप की पहचान, व्यवहार और बचाव के तरीकों पर जानकारी दी गई यह साँप चूहों की आबादी को नियंत्रित कर कृषि जैव संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। इसके ज़हर का उपयोग पॉलीवेलेंट एंटी-स्नेक वेनम के निर्माण में किया जाता है वन विभाग ने कहा कि साँपों या अन्य वन्यजीवों को देखकर घबराने की बजाय, उन्हें समझना और सुरक्षित ढंग से बचाना अधिक महत्वपूर्ण है। ग्रामीण गिरधारी लाल राजवाड़े ने बताया कि रात को अचानक जब बाथरूम के लिए घर से बाहर निकाल इस दौरान उसकी नजर उसे पर पड़ी लाइट चालू करने पर चमकने लगा उसे देखकर लगा कि कोई मामूली सांप होगा लेकिन बेहद खतरनाक और चंचल था इसकी सूचना स्नेक कैचर टीम को दी गई जहां मौके पर पहुंच रेस्क्यू किया गया। रसल वाइपर भारत के 4 बड़े विषैले सांपों में एक है जिसका जहर हिमोटॉसिन होता है बहुत ही गुस्सैल होता इससे छेड़छाड़ करने पर यह प्रेशर कुकर की तरह आवाज करता है इसका एंटी वेनम (प्रतिदंशविष) भारत में उपलब्ध है| इसकी दंश की घटनाएं ज्यादातर अजगर समझने के कारण होती है, इसके काटने वाले जगह पर सूजन होता हैं और आंख से खून निकलता हैं , नाक व जीभ के नीचे दर्द होता हैं क्यूं कि इसके काटने पर खून का जमना बंद हो जाता हैं जिससे बहुत ज्यादा खून बहता है, साथ ही इसका विष ऊतकों का सड़ाने एवं गलाने का काम करता हैं। SDO श्री आशिष खेलवार ने कहा कि वन्यजीवों से सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा देना हमारी ज़िम्मेदारी है उन्हें नुकसान न पहुंचा नहीं उनके साथ छेड़छाड़ करें।

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