गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले चरण का मतदान जारी है। छत्तीसगढ़ के सीमांत गांव धनौली और करंगरा में भी मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हो रही है। इन गांवों में निवास करने वाली विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा के बीच मतदान को लेकर गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। मतदान केन्द्रों के सामने मतदान करने के लिए मतदाताओं की लम्बी लम्बी कतारे लगी हुई है। हालांकि, बैगा जनजाति आज भी मूलभूत सुविधाओं से पूरी तरह नहीं जुड़ पाई है, फिर भी वे समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के प्रयासों में पीछे नहीं हैं। चाहे लोकसभा चुनाव हो, विधानसभा चुनाव हो या त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव। हर बार वे लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। बैगा जनजाति को "राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र" कहा जाता है, लेकिन उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति अब भी जस की तस बनी हुई है। बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहने के बावजूद उनका लोकतंत्र के प्रति विश्वास और संकल्प उम्मीद की किरण को जगाए रखता है। मतदान केंद्रों पर बैगा समुदाय के लोगों की लंबी कतारें यह दर्शा रही हैं कि वे अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कितने प्रतिबद्ध हैं। प्रशासन द्वारा भी इन गांवों में मतदान को सुगम और सुचारू बनाने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। हालांकि मतदान केन्द्रों मे कही धूप से बचने के लिए टेंट लगाए गए हैं तो कुछ मतदान केन्द्रों मे टेंट नहीं होने के चलते वोटर धूप में परेशान हो रहे हैं। बैगा आदिवासियों की मानें तो वो विकास को लेकर वोट कर रहे है। गांव का विकास होना ही चाहिए। उन्हें सड़क पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी है और उनका वोट विकास को लेकर है।