गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के 'ज्ञानभारतम' राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत जिले में एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक उपलब्धि मिली है। धनौली गांव में लगभग 300 वर्ष पुरानी रामचरितमानस की दुर्लभ पांडुलिपि प्राप्त हुई है।
यह पांडुलिपि अवधी भाषा में लिखी गई बताई जा रही है। इसके मिलने से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। इतिहासकारों और साहित्य प्रेमियों की रुचि भी बढ़ी है। यह पांडुलिपि धनौली गांव निवासी ज्ञानेंद्र उपाध्याय के परिवार के पास सुरक्षित थी। परिवार के पूर्वजों ने इस धरोहर को पीढ़ी दर पीढ़ी सहेज कर रखा। इसी कारण आज भी यह अपने मूल स्वरूप में उपलब्ध है। स्थानीय जानकारों के अनुसार इसकी लेखन शैली और संरचना काफी प्राचीन दिखाई देती है।
जिले के कलेक्टर संतोष कुमार देवांगन ने स्वयं इस दुर्लभ पांडुलिपि का अवलोकन किया। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति, साहित्य और धार्मिक परंपरा की अमूल्य धरोहर बताया। कलेक्टर ने इसके संरक्षण और अध्ययन की आवश्यकता पर जोर दिया। 'ज्ञानभारतम' अभियान के तहत जिले में प्राचीन पांडुलिपियों की खोज की जा रही है। इस अभियान का उद्देश्य विलुप्त होती पांडुलिपियों को सुरक्षित रखना और उनका दस्तावेजीकरण करना है।