जिले में बुधवार शाम को अचानक बदले मौसम ने धान खरीदी केंद्रों की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। मरवाही क्षेत्र के सिवनी धान खरीदी केंद्र में तेज बारिश और ओलावृष्टि के कारण खुले में रखा हजारों क्विंटल धान भीग गया। इस अचानक हुई बारिश से आम लोगों को गर्मी से राहत मिली, लेकिन समिति प्रबंधन के सामने धान को बचाने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
जानकारी के अनुसार, सिवनी सहित आसपास के खरीदी केंद्रों में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान का उठाव अब तक नहीं हो पाया था। पर्याप्त सुरक्षित भंडारण नहीं मिलने के कारण धान खुले मैदान में ही रखा गया था। इसी दौरान मौसम ने अचानक करवट ली और तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि शुरू हो गई।
बारिश इतनी तेज थी कि धान को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का मौका भी नहीं मिल सका, जिससे भारी मात्रा में धान भीगकर खराब होने की आशंका बढ़ गई है। भीगा हुआ धान अपनी गुणवत्ता खो देता है। इसका सीधा नुकसान समिति प्रबंधक और शासन को उठाना पड़ सकता है। लोगों का कहना है कि खरीदी केंद्रों में तिरपाल और रखरखाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसी कारण हर साल ऐसी स्थिति बनती है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
भीगे हुए धान की गुणवत्ता में गिरावट आने की पूरी संभावना है। इससे बाजार में उसकी कीमत कम हो सकती है और उसे बेचने में भी परेशानी आएगी। इस नुकसान का सीधा भार समिति प्रबंधक और राज्य सरकार पर पड़ेगा। यह धान खरीदी प्रक्रिया में एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है।
लोगों ने भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए बेहतर सुझाव दिए हैं। खरीदी केंद्रों में पर्याप्त भंडारण क्षमता और सुरक्षा के इंतजाम किए जाने चाहिए। तिरपाल और अन्य रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। इस मामले में संबंधित अधिकारियों का कहना है कि वे जल्द ही स्थिति का जायजा लेंगे और उचित कदम उठाएंगे।