बीते पांच दशक से छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी के जल को लेकर विवाद जारी है। इस विवाद के निपटारे को लेकर कई बार कमेटी का गठन कई बार किया जा चुका है। इसके बाद भी विवाद का निराकरण नहीं हो पाया है। वहीं, एक बार फिर इस विवाद के निपटारे को लेकर 3 जज समेत 25 अधिकारियों की टीम 8 मार्च को धमतरी के गंगरेल और माड्मसिल्ली बांध का दौरा करने आ रहे है।
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सिहावा पर्वत से निकली महानदी विभिन्न क्षेत्रों से बहते हुए ओडिशा राज्य में पहुंचती है। महानदी के पानी को लेकर पिछले पांच दशक से छत्तीसगढ़ ओडिशा के बीच विवाद चल रहा है। इस मामले के निराकरण के लिए केंद्र सरकार ने न्यायाधिकरण का गठन किया है। जिसमें सुप्रीम कोर्ट के जज शामिल हैं। ओडिशा का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में महानदी पर अनेक परियोजनाएं बनाकर पानी को रोक देता है। गर्मी के दिनों में सूखे की स्थिति बन जाती है जबकि छत्तीसगढ़ का तर्क है कि अपनी सिंचाई और औद्योगिक जरूरतों के लिए नदी के पानी का उपयोग करने का उन्हें अधिकार है क्योंकि कैचमेंट का बड़ा हिस्सा उसके पास है। इसके अलावा कई सहायक नदियां भी महानदी से जुड़ी हुई हैं। वर्ष 2016 में ओडिशा द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के बाद वर्ष 2018 में केंद्र सरकार द्वारा एक न्यायाधिकरण का गठन किया गया। इसी न्यायाधिकरण की टीम 8 मार्च को निरीक्षण के लिए गंगरेल और माड्मसिल्ली आ रही है। न्यायाधिकरण में शामिल सदस्य धमतरी जिले के अलावा छत्तीसगढ़ राज्य के अन्य इलाकों में दो दिनों तक दौरा करेंगे।