नगर पालिक निगम धमतरी के वार्ड 35 बागतराई सड़क स्थित मणीकंचन केंद्र में 25 मई को आग लगी थी। इस घटना की जांच राजस्व विभाग ने की है। जांच के बाद पांच किसानों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अर्थदण्ड लगाया गया है।
नगर निगम द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में बताया गया कि लगभग 23 हजार टन लिगेसी वेस्ट संग्रहित स्थल पर आग लगी थी। प्रारंभिक जांच में आशंका थी कि आसपास के खेतों में जली पराली से आग फैली। हल्का पटवारी से इस मामले में प्रतिवेदन प्राप्त किया गया।
जांच में मणीकंचन केंद्र से लगे कृषि क्षेत्रों में पराली जलकर नष्ट पाई गई। संबंधित कृषकों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुना गया। कृषकों ने पराली जलाने से इनकार किया। हालांकि, उपलब्ध राजस्व अभिलेखों के आधार पर भूस्वामियों को उत्तरदायी माना गया। जांच प्रतिवेदन ने भी उनकी जिम्मेदारी तय की।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण और सर्वोच्च न्यायालय ने पराली जलाने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का प्रावधान किया है। इसके तहत दो एकड़ से कम भूमि वाले प्रत्येक कृषक पर 5 हजार रुपये का अर्थदण्ड निर्धारित है। इसी नियम के अनुसार, संबंधित पांचों भूस्वामी कृषकों पर 5-5 हजार रुपये का अर्थदण्ड आरोपित किया गया है। कुल 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
अर्थदण्ड की वसूली के लिए संबंधितों को अलग से नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने किसानों से फसल अवशेषों का वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाने की अपील की है। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने का आग्रह भी किया गया है। यह कदम भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में सहायक होगा।