छत्तीसगढ़ में बिलासपुर के सीपत क्षेत्र के नीरतू गांव के सागौन जंगल में भीषण आग लग गई है। इस आग ने वन संपदा को गहरे संकट में डाल दिया है और बहुमूल्य पेड़ धू-धू कर जल रहे हैं। जंगल में रहने वाले वन्य जीवों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है।
आग की लपटें कई हिस्सों तक पहुंच चुकी हैं, जिससे आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि आग लगने की सूचना समय रहते वन विभाग को दे दी गई थी।
हालांकि, विभाग की ओर से अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई गई। लोगों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचने के बजाय वातानुकूलित कमरों में बैठे रहे। वे केवल फोन के जरिए निर्देश देते रहे और जमीनी स्तर पर कोई मदद नहीं भेजी।
पर्याप्त कर्मचारी और आग बुझाने के लिए जरूरी संसाधनों की व्यवस्था भी नहीं की गई। ग्रामीणों और वन विभाग के कुछ कर्मचारियों को ही सीमित साधनों से आग बुझाने के प्रयास करने पड़ रहे हैं। बिना पर्याप्त उपकरणों और सुरक्षा के वे घंटों तक आग से जूझ रहे हैं। तेज हवाओं के कारण आग बार-बार फैल जाती है, जिससे उनकी मेहनत पर पानी फिर रहा है।
वन विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और वे इसे विभाग की घोर लापरवाही मान रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर अधिकारी मौके पर पहुंचते। समुचित प्रबंधन किया जाता, तो आग को शुरुआती स्तर पर ही काबू में किया जा सकता था।
सागौन जंगल में आग से भारी नुकसान
सागौन के बहुमूल्य पेड़ों के जलने से वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है। जंगल में रहने वाले कई वन्य जीवों का जीवन भी संकट में है। आग की लपटें आसपास के गांवों में भी दहशत का माहौल बना रही हैं। तेज हवाओं के कारण आग पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है।