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बालोद में शिक्षक को प्रशासनिक अनदेखी का करना पड़ रहा सामना, पुरस्कार प्राप्त लौटाएंगे अलंकरण

Digvijay Singh Updated Fri, 05 Sep 2025 03:54 PM IST

शिक्षक दिवस पर जहां देशभर में गुरुजनों का सम्मान किया जा रहा था, वहीं बालोद जिले के एक सम्मानित शिक्षक को प्रशासनिक अनदेखी और मनमानी के चलते अपमान का सामना करना पड़ा। राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित व्याख्याता (एल.बी.) रघुनंदन गंगबोईर ने शासन को चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र न्याय नहीं मिला तो वे अपने राज्य स्तरीय “मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण –शिक्षा श्री” और “राज्य शिक्षक पुरस्कार” शासन को लौटाने पर विवश होंगे। गंगबोईर ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा अधिनियम 1961 की धारा 12(क) की अनदेखी करते हुए उन्हें कनिष्ठ घोषित कर अतिशेष’ सूची में डाल दिया। इसके साथ ही उनकी पत्नी, अंग्रेजी विषय की शिक्षिका श्रीमती पुष्पा गंगबोईर, को भी लगातार प्रशासनिक अनियमितताओं का शिकार होना पड़ा। उन्होंने यह भी बताया कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी अपूर्ण और गलत दी गई, जिससे उनकी पीड़ा और बढ़ गई। शिक्षक दंपत्ति ने बताया कि न्यायालय ने उनके प्रकरण में “यथास्थिति बनाए रखने” के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद बालोद जिला प्रशासन ने न तो उन्हें उनकी पूर्व संस्था में कार्य करने की अनुमति दी है और न ही पिछले चार माह का वेतन-भत्ता जारी किया है। उन्होंने कहा कि जबकि अन्य जिलों में न्यायालयीन प्रकरण वाले शिक्षकों को आदेशानुसार पदस्थापना और वेतन मिल रहे हैं, परंतु बालोद में माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की सीधी अवहेलना हो रही है। उन्होंने दोहराया कि यदि शासन-प्रशासन ने शीघ्र हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच व न्यायपूर्ण निर्णय नहीं दिया, तो वे अपने राज्य स्तरीय सम्मान लौटाएँगे। उनका कहना है कि यह कोई व्यक्तिगत इच्छा नहीं, बल्कि “आत्मसम्मान की रक्षा का नैतिक कदम” होगा।

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