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सरगुजा के लुंड्रा में जीवंत हुई आदिवासी परंपरा, सुगा नृत्य करते बच्चे जुटाते हैं सहयोग

सरगुजा जिले के लुंड्रा क्षेत्र में इन दिनों आदिवासी संस्कृति की एक अनोखी झलक देखने को मिल रही है। यहां आदिवासी बच्चों द्वारा दिसंबर माहभर पारंपरिक सुगा नृत्य प्रस्तुत किया जा रहा है। बच्चे समूह बनाकर घर-घर पहुंचते हैं और पारंपरिक गीतों की धुन पर नृत्य करते हुए लोगों से धान, चावल, गेहूं सहित अन्य सामग्री सहयोग के रूप में मांगते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसका उद्देश्य आपसी सद्भाव और सामुदायिक भावना को मजबूत करना है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बच्चों द्वारा एकत्र की गई सामग्री का उपयोग 1 जनवरी को आयोजित पिकनिक में किया जाता है, जिसमें गांव के सभी बच्चे उत्साहपूर्वक शामिल होते हैं। दिसंबर माह में पूरे क्षेत्र में बच्चों के गीत और नृत्य का अलग ही उल्लास नजर आता है। सरगुजा आदिवासी बहुल इलाका है और यहां की यह परंपरा न केवल सांस्कृतिक धरोहर को सहेजती है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का काम भी करती है। लुंड्रा क्षेत्र में छोटे-छोटे बच्चों को पारंपरिक परिधान में सुगा नृत्य करते देखना लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। आदिवासी समाज की यह अनूठी सांस्कृतिक अभिव्यक्ति सामाजिक सरोकार और सामूहिकता का जीवंत उदाहरण पेश करती है।

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