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अंबिकापुर में मेडिकल कॉलेज भवन पर सियासत: ओपी चौधरी और टीएस सिंहदेव आमने-सामने, अधूरा अस्पताल बना बड़ा मुद्दा

Mon, 08 Jun 2026 06:45 PM IST
अंबिकापुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुर

अंबिकापुर में राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव मेडिकल कॉलेज अस्पताल भवन के निर्माण में हो रही देरी को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी विवाद गहराता जा रहा है। अस्पताल भवन चार वर्षों से अधिक समय बाद भी अधूरा होने पर प्रदेश के वित्त मंत्री एवं सरगुजा प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

सरगुजा प्रवास के दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए ओपी चौधरी ने अस्पताल परियोजना में हुई देरी के लिए कांग्रेस शासनकाल को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे टीएस सिंहदेव और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच समन्वय की कमी के कारण यह महत्वपूर्ण परियोजना समय पर पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार ने परियोजना को प्राथमिकता देते हुए 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंजूर की है और निर्माण एजेंसी को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।

वहीं टीएस सिंहदेव ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि भाजपा सरकार को सत्ता में आए ढाई वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक अस्पताल भवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे नहीं हो पाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में मेडिकल कॉलेज की स्थापना, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं की शुरुआत, पीजी पाठ्यक्रमों की स्वीकृति और संस्थान के विस्तार जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए थे। उनके अनुसार वर्तमान सरकार को भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा करना चाहिए।

अधूरा भवन बना बड़ी चुनौती
वर्ष 2014 में शुरू हुई इस परियोजना पर अब तक लगभग 366 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। बावजूद इसके अस्पताल भवन का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। जानकारी के अनुसार आवश्यक अतिरिक्त बजट की स्वीकृति में देरी के कारण निर्माण कार्य लंबे समय तक प्रभावित रहा।

एनएमसी मानकों पर खरा उतरने की चुनौती
अस्पताल भवन अधूरा रहने से मेडिकल कॉलेज को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के मानकों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल जिला अस्पताल को संबद्ध अस्पताल के रूप में उपयोग किया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह व्यवस्था स्थायी समाधान नहीं है।

मेडिकल छात्रों पर पड़ रहा असर
आवश्यक चिकित्सा अधोसंरचना उपलब्ध नहीं होने से एमबीबीएस विद्यार्थियों की पढ़ाई और क्लीनिकल प्रशिक्षण प्रभावित हो रहा है। कॉलेज को पूर्व में दो बार जीरो ईयर का सामना करना पड़ा है, जिससे संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है।

टेंडर के बाद भी नहीं बढ़ी रफ्तार
अस्पताल भवन के शेष कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद निर्माण कार्य अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाया है। लोक निर्माण विभाग के जिम्मे शेष निर्माण कार्य हैं और सरकार का दावा है कि जल्द ही कार्य में तेजी लाकर परियोजना को पूर्ण किया जाएगा।

मेडिकल कॉलेज अस्पताल का मुद्दा अब स्वास्थ्य सुविधाओं से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। हालांकि दोनों दल सार्वजनिक रूप से यह कह रहे हैं कि जनता के हित में अस्पताल भवन का निर्माण जल्द पूरा होना चाहिए और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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