कहते हैं कि एक दान से कई जिंदिगियां बच सकती हैं और इसका सबसे बड़ा उदाहरण है अंगदान। आज भारत में लाखों लोग ऐसे हैं जो किडनी, लीवर, हार्ट, कॉर्निया जैसे अंगों के प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन अंगदाताओं की संख्या अब भी बेहद कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंगदान ही वह रास्ता है जिससे ज़रूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिल सकता है। पीजीआई चंडीगढ़ की डॉ. पारुल डॉ पारुल गुप्ता जो ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर हैं PGI चंडीगढ़ की उन्होंने बताया की अगर समय रहते लोग अंगदान के महत्व को समझें तो हजारों मरीजों की जान बच सकती है। उन्होंने बताया कि पीजीआई चंडीगढ़ द्वारा इस दिशा में कई तरह के कैंपेन और जागरूकता कार्यक्रम लगातार चलाए जा रहे हैं। स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों और आम लोगों के बीच सेमिनार, रैली और वर्कशॉप्स आयोजित कर उन्हें अंगदान के महत्व से जोड़ा जा रहा है। डॉ. पारुल गुप्ता ने कहा कि अंगदान केवल किसी का जीवन बचाना ही नहीं बल्कि मानवीय कर्तव्य भी है। उन्होंने इसे जीवन से जीवन जोड़ने की अनमोल प्रक्रिया बताया।उन्होंने बताया कि पीजीआई चंडीगढ़ द्वारा इस दिशा में कई तरह के कैंपेन और जागरूकता कार्यक्रम लगातार चलाए जा रहे हैं। स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों और आम लोगों के बीच सेमिनार, रैली और वर्कशॉप्स आयोजित कर उन्हें अंगदान के महत्व से जोड़ा जा रहा है।