भाजपा के फायरब्रांड नेता वरुण गांधी वर्तमान में देश की शिक्षा पॉलिसी से खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हम अपनी शिक्षा व्यवस्था से आउटडेटेड हो चुकी डिग्रियों को बाय-बाय कह दें।
इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि आज देश में 20 प्रतिशत पोस्ट ग्रेजुएट हैं, इनमें से 27 प्रतिशत युवा ऐसे हैं जिन्हें डिग्री लेने के तीन साल बाद भी रोजगार नहीं मिला है। इसके अलावा पिछली सरकारों को कोसते हुए उन्होंने कहा कि देश के हालात यह है कि एजुकेशन पॉलिसी में बदलाव करने में 26 साल लग गए।
आज की जरूरत के मुताबिक विश्वविद्यालय में नए और प्रैक्टिकल नॉलेज पर आधारित कोर्सेज शुरू किए जाएं। साथ ही स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र में भी बड़े सुधार की गुंजाइश बताई। वरुण गांधी बाबा फरीद इंस्टीट्यूट में चल रहे टेकभनोजश्न के समापन समारोह में हिस्सा लेने के लिए दून आए थे।
राजनीति सवालों से बचे लेकिन देश के हालात पर खुलकर बोले गांधी
मंगलवार को दून पहुंचे यूपी के सुल्तानपुर से बीजेपी सांसद वरुण गांधी वैसे तो राजनीतिक सवालों बचते नजर आए लेकिन देश के हालात पर खुलकर बोले। उन्होंने कहा कि पॉलिटिकल साइंस, सोश्योलॉजी, सोशल वर्क जैसे कई कोर्स ऐसे हैं जो केवल किताबी ज्ञान तक सीमित हैं।
बेहतर हो कि अगर पॉलिटिकल साइंस के छात्रों को किसी पंचायत, नगर पालिका, पॉलिटिकल पार्टी, संसद, विधानसभा में इंटर्नशिप के लिए भेजा जाए। उन्होंने कहा कि इंफोसिस जैसी मल्टीनेशनल कंपनी को अपने कर्मचारियों की शिक्षा और ट्रेनिंग पर एक हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जिसमें 68 प्रतिशत कर्मचारी आईआईटी और आईआईएम से पासआउट थे।
ऐसे हालात में अंदाजा लगाया जा सकता है कि हमारी शिक्षा किस स्तर की है। उन्होंने स्किल्स पर जोर देते हुए इस ओर बदलाव की जरूरत बताई। स्वास्थ्य सुविधाओं में बारे में भी उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ के सर्वेक्षण के मुताबिक एक हार्ट सर्जरी में औसत डेढ़ लाख का खर्च आता है। लेकिन आम ग्रामीण परिवार की मासिक आय महज पांच हजार रुपये होती है।