मां गंगा के मायके मुखबा (मुखीमठ) में हरदुधु मेला हर्षोल्लास के साथ संपन्न हो गया। मेले में श्रद्धालुओं ने नाग देवता की पूजा अर्चना कर दूध और दही का प्रसाद चढ़ाया। पहले दिन बुधवार रात को बुग्यालों से फूल लाकर गांव के चौक को भव्य ढंग से फूलों से सजाया गया। इसके बाद सोमेश्वर देवता की डोली ने नृत्य किया। दूसरे दिन बृहस्पतिवार को ग्रामीणों ने पारंपरिक पोशाक पहनकर रासों नृत्य किया। इस अवसर पर देवता के पश्वा ने डांगरी (फरसों) चलकर भक्तों को आशीर्वाद दिया।
विकासखंड भटवाड़ी की उपला टकनौर घाटी के गांवों में इन दिनों सावन मेलों की धूम है। इन्हीं मेलों में एक मां गंगा शीतकालीन स्थल मुखबा का हरदुधु मेला। प्रत्येक वर्ष 20 और 21 गते को हरदुधु मेले का आयोजन होता है। तीर्थ पुरोहित सुधांशु सेमवाल ने बताया कि मेले की खास बात यह है कि मेले में सबसे पहले ब्रह्मकमल लाया जाता है। सोमेश्वर देवता को चढ़ाया जाता है। इसके बाद कोई भी ब्रह्मकमल ला सकता है। बताया कि मेले में आने वाले प्रत्येेक श्रद्धालुओं को एक-एक ब्रह्मकमल का प्रसाद दिया जाता है, जिसे लोग अपने घरों में रखते हैं। मान्यता है कि ब्रह्मकमल को घरों में रखने से सुख और शांति बनी रहती है। साथ ही नागदेवता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस मौके पर सुरेश सेमवाल, सुधांशु सेमवाल, सुभाष सेमवाल, सुमेश सेमवाल, राजेश सेमवाल, द्वारिका प्रसाद, केशव सेमवाल, सुशील सेमवाल, गायत्री सेमवाल, कामेश्वरी देवी, गीता सेमवाल आदि शामिल हुए।