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अब न पानी चोरी होगा और न ही लीकेज होने पर खोदनी होगी पूरी लाइन

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पेयजल लाइन चौक होने या लीकेज होने पर अब पूरी लाइन नहीं खोदनी पड़ेगी। इसके अलावा पानी चोरी या अनियमित वितरण का भी तुरंत पता चल जाएगा। जिले के कुछ शहरों में स्काडा तकनीक से पेयजल वितरित किया जाएगा। इसके लिए डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी जा चुकी है।
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उत्तरकाशी जनपद के चार स्थानीय निकायों में बाह्य साहयतित कार्यक्रम के तहत स्काडा तकनीक से पेयजल वितरण किया जाना है, जिसमें बड़कोट व चिन्यालीसौड़ पालिका क्षेत्र, नौगांव व पुरोला नगर पंचायत क्षेत्र शामिल हैं। इसके लिए जल निगम ने डीपीआर भी तैयार कर ली है। स्काडा तकनीक में पेयजल वितरण प्रणाली को नियंत्रित करने के लिए मास्टर कंट्रोल रूम बनाया जाता है, जिसमें फ्लो मीटर लगे होते हैं। इन मीटरों से यह पता चलता है कि पेयजल लाइन से किस वार्ड में कितना पानी भेजा गया था और कितना खर्च हुआ। यदि किसी स्थान पर लाइन चौक या लीकेज हो तो उसे ढूंढने के लिए पूरी लाइन नहीं खोदनी होगी। मास्टर कंट्रोल रूप में लगे सेंसर उक्त स्थान का पता बता देंगे। साथ ही पानी चोरी की घटनाएं भी नियंत्रित होंगी। इस तकनीक से पेयजल वितरण के लिए कम मानव संसाधनों की आवश्यकता होगी। अधिकांश कार्य कंप्यूटर से ही होंगे। संवाद
किसे मिलेगा कितना पानी
इस योजना के तहत व्यावसायिक व घरेलू प्रयोग के लिए पेयजल वितरण की मात्रा निर्धारित की गई है। घरेलू प्रयोग के लिए प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी प्रतिदिन मिलेगा। इसके अलावा रेस्टोरेंटों में एक चेयर (एक दिन में एक चेयर पर जितने भी व्यक्ति आएं) के लिए 70 लीटर प्रतिदिन, अस्पताल में एक बेड के लिए 400 लीटर प्रतिदिन व आवासीय विद्यालय के लिए 135 लीटर पानी प्रतिदिन के हिसाब से दिया जाएगा।
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जापानी बैंक से हो रहा अनुबंध
जल निगम के अधिकारियों का कहना है कि पूर्व में उक्त योजना का निर्माण चीन के बैंक के सहयोग से किया जाना था, लेकिन अब जापानी बैंक से अनुबंध किया जा रहा है।
क्या है स्काडा सिस्टम
स्काडा एक केंद्रीय नियंत्रण प्रणाली है, जिसमें इपनुट, आउटपुट, संचार उपकरण, और सॉफ्टवेयर शामिल हैं। इस सिस्टम का उपयोग औद्योगिक प्रक्रिया में उपकरणों की निगरानी नियंत्रण के लिए किया जाता है। इसमें विनिर्माण, उत्पादन, विकास, निर्माण व जल वितरण शामिल हैं। स्काडा प्रणाली मीटर की रीडिंग लेती है और नियमित अंतराल में सेंसर की स्थिति की जांच करती है।
- स्काडा तकनीक से पेयजल वितरण के लिए जिले के चार शहर चयनित किए गए हैं। विभाग ने डीपीआर बना कर भी भेज दी है। संभावना है कि जल्द योजना पर कार्य शुरू हो जाए। - मुकेश जोशी, अधिशासी अभियंता, जल निगम उत्तरकाशी।
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