आजाद मैदान ही नैसर्गिक खूबसूरती से लबरेज शहर की सुंदरता पर दाग लगा रहा है। मैदान को सजाने संवारने के लिए मुख्यमंत्री से लेकर पालिकाध्यक्ष ने चुनावी घोषणाएं तो की, लेकिन कोई भी घोषणा धरातल पर नहीं उतर पाई। मैदान में कूड़ा भी डंप किया जा रहा है।
आजाद मैदान में खेल, राजनीतिक व सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र है, लेकिन पिछले कई वर्षों से मैदान का प्रयोग वाहनों की पार्किंग व ठेली फड़ संचालन के लिए किया जा रहा है। मैदान अतिक्रमण की चपेट में भी है, जिससे इसका वास्तविक स्वरूप बिगड़ रहा है। वर्ष 2013 मे तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आजाद मैदान को मिनी स्टेडियम बनाने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक संबंध में प्रस्ताव तक तैयार नहीं किया गया है। 8 वर्ष बाद भी घोषणा धरातल पर नहीं उतर पाई है। पालिकाध्यक्ष ने पालिका चुनाव के दौरान आजाद मैदान की दशा सुधारने का वायदा किया था, लेकिन वायदा धरा का धरा रह गया। पालिकाध्यक्ष रमेश सेमवाल का कहना है कि मैदान में वाहनों के पार्क होने से यहां हरी घास नहीं लग पा रही है। वाहनों को यदि मैदान से बाहर किया जाएगा, तो बाजार में जाम की स्थिति पैदा हो जाएगी। वहीं जिला क्रीड़ा अधिकारी निधि बिंजोला का कहना है कि मिनी स्टेडियम निर्माण के लिए पालिका से एनओसी ली जानी है। इसके लिए पालिका से कई बार पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन पालिका से एनओसी नहीं मिल पा रही है।