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गृह विज्ञान की प्रयोगात्मक परीक्षा में बनाए गढ़वाली व्यंजन

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विकासखंड चिन्यालीसौड़ के जीआईसी रौंतल में हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा के तहत आयोजित गृह विज्ञान की प्रयोगात्मक परीक्षा में गढ़ भोज को शामिल किया गया। इस दौरान छात्राओं ने एक से बढ़कर एक गढ़वाली व्यंजन तैयार किए।
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गढ़भोज के प्रणेता व सामाजिक कार्यकर्ता द्वारिका प्रसाद सेमवाल की पहल पर जीआईसी रौंतल में गृह विज्ञान की प्रयोगात्मक परीक्षा में गढ़भोज शामिल किया गया था। इस दौरान छात्राओं ने कंडाली (बिच्छू घास) का साग, मंडुवे की रोटी, दाल के पकोड़े, झिंगोरे की खीर, अमेड़ा की चटनी आदि गढ़वाली व्यंजन तैयार किए थे। इस दौरान छात्राओं ने इन व्यंजनों में मौजूद पौष्टिक तत्वों के बारे में भी बताया। द्वारिका सेमवाल ने कहा कि गढ़वाली व कुमाऊंनी व्यंजन विलुप्ति की कगार पर है। युवा पीढ़ी चाइनीज फूड का सेवन अधिक कर रही है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। हमारा प्रयास नई पीढ़ी को इन व्यंजनों से रूबरू कराने के साथ ही बनाने की विधि और महत्ता भी बताना है। यदि सभी विद्यालयों में प्रयोगात्मक परीक्षा व मध्याह्न भोजन में इसे शामिल किया जाए, तो प्रयास जल्द सफल हो जाएगा। वहीं विद्यालय के प्रधानाचार्य विजयपाल सिंह ने इसे सार्थक पहल बताया। इस मौके पर विद्यालय के शिक्षक गोपाल प्रकाश मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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