बारिश व बर्फबारी नहीं होने से सूखे के हालात, सेब के पेड़ों को नहीं मिल पा रहा ठंडा वातावरण
पुरोला/नौगांव। बारिश और बर्फबारी नहीं होने से उत्पन्न हुए सूखे के हालात ने नौगांव, पुरोला व मोरी के सेब काश्तकारों की चिंता बढ़ा दी है। सूखे के चलते सेब के पेड़ों को पर्याप्त ठंडा वातावरण (चिलिंग ऑवर) नहीं मिल पा रहा है। इससे सेब के पेड़ों का फसल चक्र गड़बड़ाने के साथ आगामी सीजन में उत्पादन प्रभावित होने का खतरा भी बना हुआ है।
पिछले कुछ वर्षों से मौसम के बदले मिजाज के चलते शीतकाल में बारिश व बर्फबारी लगातार घटती जा रही है। सीजन में भी गत तीन माह से रवाईं घाटी में बारिश नहीं हुई है, जिसके चलते उत्पन्न हुए सूखे की स्थिति से सेब काश्तकारों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। सूखे के चलते सेब के पेड़ों को ठंडा वातावरण (चिलिंग ऑवर) नहीं मिल पा रहे हैं, जबकि दिसंबर से लेकर फरवरी तक सेब के पेड़ों के लिए ठंडा वातावरण रहना बेहद जरूरी है। ऐसा नहीं होने से सेब के पेड़ों में फसल चक्र गड़बड़ाने से उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
रवाईं घाटी के नौगांव ब्लाॅक की स्योरी फलपट्टी में सूखे के चलते काश्तकार मिट्टी के सख्त होने से पौधों को गोबर की खाद देने के लिए थाले भी नहीं बना पा रहे हैं। इसके अलावा अभी तक बगीचों में वह न तो पौधों की काट छांट कर पाए हैं और न ही नई पौधों के लिए गड्ढे तैयार कर पाए हैं।
पेड़ों पर लगने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए जरूरी दवाओं का भी छिड़काव नहीं हो पाया है। सेब उत्पादक गजेंद्र नौटियाल, विजय बंधानी, अजब सिंह का कहना है कि बेमौसमी सूखे ने उनकी धड़कने बढ़ा दी है। बगीचों में जो कार्य इस माह तक हो जाने थे। वे सूखे की वजह से नहीं हो पाए हैं, जिसका असर फसल के उत्पादन पर पड़ना तय है।
पुरोला ब्लाक के धलोड़ी, करड़ा, चपताड़ी, खलाड़ी, कुमोला, छानिका व मोरी के गेन्चवाणगांव, नैटवाड़, सांकरी, चिवां, जागटा, बरनाली गांव में भी कमोबेश यही स्थिति है। क्षेत्र के प्रमोद गोयल, राम प्रसाद, कपिल, जसबीर, नेपाल सिंह, बिजेंद्र रावत, विनोद रतूड़ी आदि का कहना है कि जनवरी का पहला हफ्ता गुजर चुका है, लेकिन अब तक बारिश व बर्फबारी नहीं हुई है।
घाटी में हैं 1500 से अधिक सेब बागवान
जनपद की रवाईंघाटी में 1500 से अधिक सेब बगवान हैं। यमुनाघाटी की स्योरी फल पट्टी में करीब 1200 परिवारों के सेब के बगीचे हैं। उधर, पुरोला व मोरी में भी 500 से अधिक परिवार की आर्थिकी सेब बागवानी पर ही टिकी हुई है।
क्या है चिलिंग ऑवर
सेब के पेड़ों के लिए चिलिंग ऑवर या शीतमान शीत निंद्रा की तरह होती है, जिसमें पौधे विश्राम करते हैं। ये कम से कम 500 से 1500 घंटे होना जरूरी होता है। जब यह अविध पूरी नहीं होती है तो फसल चक्र गड़बड़ाने के साथ पेड़ों में फ्लावरिंग भी सही नहीं होती है।
हर्षिल घाटी में हल्की बर्फबारी हुई है। रवाईंघाटी में भी 15 फरवरी तक बारिश व बर्फबारी होने की उम्मीद है। रात में तो तापमान 7 डिग्री सेल्सियस से नीचे जा ही रहा है। बारिश व बर्फबारी हो जाएगी तो ज्यादा दिक्कत नहीं होगी।
-डीके तिवारी, मुख्य उद्यान अधिकारी उत्तरकाशी।