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राजस्व रिकॉर्ड के लिए लगा रहे 40 किमी की दौड़

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जनवरी 2017 में नव सृजित उप तहसील बर्निगाड़ में सरकार अभी तक तहसीलदार और नायब तहसीलदार नहीं भेज पाई है, जिससे उप तहसील बर्निगाड़ में शामिल 65 गांव के लोगों को राजस्व रिकॉर्ड के लिए 40 किमी की दौड़ लगानी पड़ रही है।
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क्षेत्र के लोगों की सुविधा के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने बर्निगाड़ को उप तहसील बनाने की घोषणा की थी, लेकिन तहसीलदार व नायब तहसीलदार की तैनाती नहीं कर पाई है। बड़कोट तहसील से बनने वाले आय, जाति व अन्य पिछड़ा वर्ग आदि प्रमाणपत्र पत्र बर्निगाड़ उप तहसील के नाम से जारी किए जा रहे हैं। तीन जनवरी 2017 को राजस्व अनुभाग द्वारा जारी अधिसूचना में तीयां, दारसों, कुंवा, गढ़, गातू, कण्डारी छह राजस्व निरीक्षक (पटवारी) क्षेत्रों में शामिल 65 गांवों को बड़कोट तहसील सीमा से हटा कर उप तहसील बर्निगाड़ में शामिल किया गया था। आज साढ़े चार साल बाद भी नव सृजित उप तहसील सिर्फ कागजों में ही संचालित हो रही है। कांग्रेस पार्टी के प्रदेश सचिव सोहन बहुगुणा और जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष रणवीर रावत का कहना है कि मुख्यमंत्री सरकार की सभी घोषणाओं को पूरा होने की बात कह रहे हैं, लेकिन लोगों को सुविधाओं के लिए आज भी जूझना पड़ रहा है।
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