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उत्तराखंड को विशेष राज्य का दर्जा, पर फंड नहीं

Thu, 04 Apr 2013 12:15 AM IST
बृजेश सिंह
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उत्तराखंड को पूर्वोत्तर राज्यों की भांति केंद्र सरकार ने विशेष राज्य का दर्जा तो दे दिया है लेकिन आर्थिक मदद के मामले में भेदभाव बरकरार है। ताजा मामला शिक्षा विभाग का है।
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मानव संसाधन मंत्रालय ने अन्य विशेष राज्यों की तर्ज पर उत्तराखंड को सर्वशिक्षा अभियान में 90 फीसदी आर्थिक योगदान देने से इंकार कर दिया है।

मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री मंत्रीप्रसाद नैथानी ने राज्य को केंद्र द्वारा आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने के संदर्भ में सर्वशिक्षा अभियान के तहत फंड पैटर्न पूर्वोत्तर के राज्यों की तर्ज पर 90:10 किए जाने की मांग की थी।

जवाब में मंत्रालय ने कहा कि कैबिनेट ने केवल पूर्वोत्तर के राज्यों को ही केंद्र की ओर से सर्वशिक्षा अभियान मद में 90 फीसदी फंड देने का फैसला लिया है। इस आधार पर उत्तराखंड को अन्य राज्यों की भांति ही फंड दिया जाएगा।
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उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व ही हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड को पहाड़ी राज्य होने के कारण विशेष दर्जा दिया गया किंतु केंद्र ने आर्थिक मदद के मामले में पूर्वोत्तर के पहाड़ी राज्यों की तर्ज पर अभी तक आर्थिक मदद नहीं उपलब्ध कराई है। एसएसए में इन दोनों राज्यों को दस प्रतिशत अधिक मदद दी जा रही है जो कि पूर्वोत्तर के राज्यों से काफी कम है।

शिक्षा मंत्री नैथानी ने आरटीई के तहत कुछ अन्य मामलों में भी मंत्रालय से सहयोग की मांग की थी। उन्होंने वर्ष 2009 के पहले बीएड कर चुके बेरोजगार युवकों को भी प्राइमरी शिक्षक के रूप में भर्ती की अनुमति देने को कहा था।

इस पर मंत्रालय ने कहा है कि उत्तराखंड सहित 13 राज्यों को यह छूट दी गई है कि टीईटी परीक्षा पास करने वाले बेरोजगारों को शिक्षक के रूप में भर्ती की अनुमति होगी। ऐसे में बीएड पास बेरोजगार भी टीईटी परीक्षा पास करके प्राइमरी टीचर बन सकते हैं।
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