आपदा प्रभावित क्षेत्रों में फंसे तीर्थयात्रियों और इन्हें बचाने में लगे जवानों के लिए बारिश मुसीबत बन गई है। इस आपदा में 822 लोगों के मरने की पुष्टि हो चुकी है।
खराब मौसम के चलते मंगलवार को सेना, आईटीबीपी और एनडीआरएफ का बचाव अभियान बुरी तरह प्रभावित रहा। दोपहर बाद ही बचाव अभियान रफ्तार पकड़ पाया।
बारिश, बादल और धुंध के चलते साढ़े छह से सात हजार फंसे लोगों को निकालने का लक्ष्य लेकर चले जवान लगभग दो हजार लोगों को ही निकालने में कामयाब हो सके।
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उत्तराखंड के मुख्य सचिव सुभाष कुमार के मुताबिक शाम तक के अभियान के बाद अब भी पांच हजार लोग फंसे हैं। हालांकि सोमवार को यह संख्या चार हजार बताई थी।
चमोली, उत्तरकाशी में बचाव अभियान जारी
सेना की मध्य कमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चैत ने अभियान का निरीक्षण कर हर्षिल में फंसे लोगों से बातचीत की और उन्हें आश्वस्त किया कि दो दिन के भीतर सभी को निकाल लिया जाएगा।
चमोली और उत्तरकाशी जिले में सेना का बचाव अभियान मंगलवार को भी जारी रहा। हर्षिल से 369 लोगों को निकाले जाने के बाद 1000 लोग अब भी फंसे हैं। चमोली जिले से लगभग 1100 लोग निकाले जा सके।
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बदरीनाथ धाम और आसपास के इलाकों में 2500 तीर्थयात्री और लगभग डेढ़ हजार स्थानीय लोग फंसे हैं। वायुसेना ने 435 लोग जगह-जगह से निकाले हैं।
केदारघाटी में अभियान के दौरान केदारनाथ के रास्ते पर एक गुफा के पास 86 साधु-संत सुरक्षित मिले। साधुओं के मुताबिक केदारघाटी में आपदा से स्थानीय गांवों के भी कई लोग लापता है।
बदरीनाथ धाम में मौजूद सभी यात्री सकुशल हैं। लेकिन धैर्य खोते यात्री अब अपनी जान को दांव पर लगाकर पैदल ही जंगल के अनजान रास्तों से जोशीमठ के लिए निकल रहे हैं।
बदरीनाथ से लामबगड़ के बीच ऐसे सैकड़ों यात्रियों के फंसे होने की आशंका है। बारिश के चलते मंगलवार को ऐसे यात्रियों की मुश्किलें काफी बढ़ गईं। अलकनंदा के किनारे सैकड़ों यात्री फंसे हैं सो अलग।
पहाड़ पर भारी बारिश की चेतावनी
उत्तराखंड में मंगलवार को कई जगह बारिश हुई। आपदा प्रभावित जिलों में चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी में भी कई जगह तेज बौछारें पड़ीं। मौसम विभाग की मानें तो अगले 24 घंटे में इन जिलों में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा पूरे उत्तराखंड में अनेक स्थानों पर भारी बारिश की आशंका है।
खराब मौसम ने डाली बाधा
मौसम दोपहर में कुछ साफ होने पर बदरीनाथ के लिए हेलीकॉप्टर की केवल चार उड़ानें ही हो सकीं, जिनमें वहां फंसे 60 लोगों को ही निकाला जा सका।
टिहरी में भूस्खलन, देवप्रयाग में बादल फटा
टिहरी में भूस्खलन के चलते एक महिला और एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि देवप्रयाग में फिर बादल फटने की खबर है। अगस्त्यमुनि और रुद्रप्रयाग में भी भारी बारिश हुई है।
केदारनाथ में तलाशी और राहत अभियान पूरा
केदारनाथ और आसपास के इलाके में तलाशी और राहत अभियान मंगलवार को पूरा हो गया। रुद्रप्रयाग जिले में राहत अभियान के नोडल अफसर रविनाथ रमन ने कहा कि केदारनाथ के आसपास जंगलों से सभी जीवित लोगों को निकाल लिया गया है।
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अब सुरक्षा बल के जवान वहां से गुप्तकाशी लौट आए हैं। सोन प्रयाग में भी एनडीआरएफ की टीम के कुछ लोग ही रह गए हैं। रामबाड़ा से भी बचाव दल के लोग गुप्तकाशी लौट आए हैं।
142 शव और मिलेः इनमें 127 केदारनाथ में मिले और 15 शव गंगा से मिले।
822 हुई मरने वालों की संख्या।
कहां-कहां से निकाले गए
-253 लोग हर्षिल से हेलीकॉप्टर के जरिए निकाले गए।
-116 लोगों को पैदल, सड़क मार्ग से निकालने का दावा।
-बदरीनाथ से पैदल व सड़क मार्ग से 740 लोग निकाले।
-लामबगड़ में हैली ब्रिज, बर्मा ब्रिज से 260 लोग पार हुए।
-बदरीनाथ से 18 उड़ानों के जरिए सेना ने 90 लोग निकाले।
-एयरफोर्स की 53 उड़ानों से 435 लोग निकाले गए।
-केदारनाथ के रास्ते पर गुफा के पास 86 साधु-संत सुरक्षित मिले।
-कुमाऊं में पिथौरागढ़ से भी 92 फंसे लोग निकाले गए हैं।
--दो हजार लोगों को ही निकाला जा सका मंगलवार को।
--4000 तीर्थयात्री और स्थानीय लोग अब भी बदरीनाथ और आसपास के इलाकों में फंसे हैं।
--1000 लोग अब भी हर्षिल में फंसे हैं अभियान में लगे जवानों के मुताबिक।
--350 ऐसे लोगों की गुमशुदगी प्रदेश के विभिन्न थानों में दर्ज हो चुकी है, जो यात्रा पर गए थे।
--15 किलो के फूड पैकेट्स प्रति व्यक्ति बुधवार से प्रभावित इलाकों में गिराए जाएंगे। ये वो गांव हैं, जो अन्य इलाकों से कट गए हैं।
--435 सड़कों पर अभी आवाजाही ठप है।
--2 दिन में सभी फंसे लोगों को निकालने का आश्वासन दिया जनरल अनिल चैत ने।