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आपदा प्रबंधन की स्थिति आज भी जस की तस

Tue, 16 Jul 2013 10:59 AM IST
सुधाकर भट्ट
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कोई बड़ी घटना या आपदा सबक सिखा जाती है। 16-17 जून को केदार और गंगोत्री घाटी में आई आपदा ने भारी तबाही मचाई। इसने आपदा से निपटने की राज्य की तैयारियों की पोल भी खोल दी।
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उम्मीद की जा रही थी कि आपदा के एक माह बाद राज्य सरकार की नींद टूटेगी और आपदा प्रबंधन की दिशा में बड़ी तेजी से कदम बढ़ेंगे। लेकिन इस दौरान इस दिशा में राज्य सरकार ठोस कदम नहीं बढ़ा पाई। एक माह बाद भी आपदा प्रबंधन की हालत जस की तस है। आधा महीना फंसे लोगों को निकालने में ही लगा।

एक महीने बाद भी ये काम नहीं हो पाए
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में पद का सृजन नहीं
मैनेजमेंट इंफारमेशन सिस्टम का विकास
प्रदेश में विश्वसनीय संचार नेटवर्क की स्थापना
पूर्व गठित राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को सक्रिय बनाना
केदारघाटी में बने 192 नए भूस्खलन पर रणनीति
नवगठित पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण प्राधिकरण की दिशा में आगे कदम
आपदा से हुए नुकसान का आधिकारिक आकलन
आपदा के 15 दिन के भीतर सभी पीड़ितों को राहत पहुंचाना
नए खतरे का अनुमान लगाना और जोखिम का निर्धारण

सरकार की प्राथमिकता नहीं
आपदा प्रबंधन सरकार की प्राथमिकता में नहीं दिखता। 16 जून के बाद सरकार ने तीन बार कैबिनेट की बैठक बुलाई। पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण प्राधिकरण के गठन का फैसला किया गया पर पहले से ही गठित राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को क्रियाशील करने में दिलचस्पी नहीं ली गई।
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मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित इस आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में करीब छह मंत्री और शामिल हैं। प्राधिकरण को आपदा प्रबंधन से संबंधित कोई भी फैसला लेने का अधिकार है। इतना होते हुए भी यह प्राधिकरण नजरों से ओझल है।

मैंने मुख्यमंत्री को प्राथमिक आकलन के आधार पर रिपोर्ट भेजी है। इसमें 15 सुझाव हैं। जहां तक  संभावित आपदा से निपटने की तैयारी का सवाल है। मेरा मानना है कि इस पहलू पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
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-नवप्रभात, अध्यक्ष, राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति

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