भटवाड़ी प्रखंड का 70 परिवार वाला सेकू गांव कभी भी तबाह हो सकता है। गांव के ऊपर से पहाड़ी दरक रही है। पहाड़ से बड़े-बड़े बोल्डर गिर रहे हैं।
इससे डरे सहमे कई परिवार गांव छोड़कर छानियों में रह रहे हैं। प्रशासन की ओर से अधिकारी तो अधिकारी, पटवारी भी इस गांव में नहीं गया।
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भूस्खलन की सूचना पर रविवार को मैं सेकू गांव के लिए निकला। 8 किमी डिगिला तक वाहन से पहुंचा। यहां से आगे सड़क बंद थी। मैं गांव के सर्जन सिंह के साथ पगडंडियों से होकर आगे बढ़ता गया। करीब चार किमी चलने के बाद गांव पहुंचा। ज्यादातर घर खाली थे। एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि 17 जून से पहाड़ी दरक रही है।
लगातार गिर रहे थे बोल्डर
लगातार बडे़-बडे़ बोल्डर ऊपर से गिर रहे हैं। डर से ज्यादातर लोग छानियों में चले गए हैं। ऊपर पहाड़ी पर गया तो देखा कि वहां बड़ा छेद बना है। जिससे पहाड़ी के अंदर पानी घुस रहा था। ग्रामीणों ने बताया कि बरसात में यहां से भारी मात्रा में पानी घुसता हैं, जिससे पहाड़ी दरक रही है।
छानियों में गए तो वहां कई परिवार एक ही कमरे में गुजर-बसर कर रहे थे। 62 वर्षीय रामचंद्री बताती हैं कि अब तक गांव में पटवारी तक नहीं आया। राहत के लिए गांव वाले चार किमी पैदल चलकर डिगिला पहुंचे, लेकिन अब तो राहत भी खत्म होने वाली है। ऐसे में क्या खाएंगे और कहां रहेंगे।
मोमबत्ती से रोशन हो रहा गांव
सेकू गांव में चार माह से बिजली आपूर्ति ठप है। राहत तो गांव में पहुंच गई, लेकिन ग्रामीणों को केरोसिन नहीं दिया गया। वे मोमबत्ती के सहारे जीवन यापन कर रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि अब तो मोमबत्ती भी खत्म होने वाली हैं। ऐसे में वह कैसे जीवन यापन करेंगे।