केदारनाथ में 16-17 जून की यात्रा में मारे गए सारकोट के सात परिवारों के घर में अन्न का एक दाना नहीं है। घर के एक मात्र कमाऊ सदस्यों की जलप्रलय में मौत हो जाने परिजनों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है।
बुधवार को गांव पहुंचे स्व. चंद्र सिंह यायावर समिति के सदस्यों को ग्रामीणों ने अपनी आपबीत बताई।
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ब्लाक के सरकोट गांव के राजे सिंह का अपना घर नहीं है। वह अपनी गर्भवती पत्नी भागुली देवी और एक वर्षीय बेटी आरती को यह दिलासा देकर केदारनाथ गया था कि आने के बाद घर बनाऊंगा, लेकिन वह आजतक नहीं लौटा। वहीं गांव का सोबन सिंह होटल स्वामी गुप्ताकशी निवासी प्रेम सिंह सजवाण के साथ काम कर रहा था, लेकिन हादसे के बाद से नहीं लौटा है।
भीम सिंह के पिता अमर सिंह, माता कुंतुली देवी अस्वस्थ हैं। पुत्री करीना (3), प्रियंका डेढ़ वर्ष और प्रियांश सात माह की
समझ में नहीं आ रहा कि उनके परिजन क्यों रो रहे हैं। प्रेम सिंह की चार पुत्रियां पिता की मौत को नहीं समझ पा रहे हैं। दो बहिनों की शादी का बोझ भी प्रेम के कंधों पर था।
गौरीकुंड गया था, लेकिन लौटा नहीं
कल्याण सिंह की पत्नी पार्वती देवी घर और बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी, समझ नहीं पा रही है। हयात दो बेटी और विकलांग मां को छोड़कर चले गया है। दरबान की एक माह पहले ही विवाह हुआ था। बलवंत का बेटा विनोद (18) 12वीं की परीक्षा देकर गौरीकुंड गया था, लेकिन लौटा नहीं है।
दो साल पहले उनके छोटे बेटे की तालाब में डूबने से मौत हो गई थी। बलवंत और उसकी पत्नी शाखा देवी के लिए दोहरा शोक बरदाश्त करना मुश्किल हो रहा है। लाल सिंह भी गौरीकुंड से लौटा नहीं है। लाल सिंह का छोटा भाई विजय उस दिन गौरीकुंड में था। वह कहता है कि भाई नदी के पार रहता था, अब उस जगह का नामोनिशान ही नहीं है।
आपदा में मरे लोगों को मुआवजा दिया जाएगा, लेकिन सारकोट में बाढ़ और भू-स्खलन जैसे हालात नहीं है। इसलिए वहां राहत नहीं भेजा जा सकता।
- एसए मुरुगेशन, जिलाधिकारी चमोली
जिला प्रशासन को अविलंब प्रभावित परिवारों को राशन की व्यवस्था कर चिकित्सा शिविर लगाना चाहिए।
- बीएस बुटोला, उपाध्यक्ष स्व. चंद्र सिंह यायावर स्मृति समिति