शायद उत्तराखंड मुख्यमंत्री हरीश रावत विधानसभा चुनाव से पहले सारा हिसाब चुकता कर लेना चाहते हैं। चुनाव में किसी तरह की फजीहत न हो इसलिए उन्होंने आज ठंडे बस्ते में पड़े आबकारी विभाग से जुड़े अपने पुराने सचिव के स्टिंग आपरेशन की न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया।
ताकि चुनाव में नफे नुकसान की फिक्र ना करनी पड़े। यदि भाजपा इस मुद्दे को उठाएगी तो हरीश के पास न्यायिक जांच कराने का हथियार रहेगा। हालांकि यह पैतरा कितना दमदार होगा, इसका पता तो समय आने पर ही चलेगा। अब हर पहलू को चुनावी चश्मे से देखा जाना लाजिमी है।
विगत 22 जुलाई 2015 में सीएम के सचिव के स्टिंग आपरेशन की 17 मार्च 2016 में न्यायिक जांच के आदेश करना वैसे तो चौंकाने वाला है, लेकिन इसके पीछे कई तरह के सियासी निहितार्थ छुपे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो हरीश इस दाग को चुनाव से पहले ही धो देना चाहते है।
इसीलिए उन्होंने आज जस्टिस इरशाद हुसैन को मामले की न्यायिक जांच सौंपी। सत्ता से जुड़े लोगों का मानना है कि चूंकि इस मामले की ओरिजनल सीडी किसी के पास नहीं है, भाजपा ने भले ही राजभवन को सीडी सौंपी हो, लेकिन सरकार लगातार ओरिजनल सीडी व सीडी बनाने वाले इक्वीपमेंट मांग रही है। यह सब कहीं से नहीं मिला।
जिला पुलिस ने भी इस फाइल को यही कारण बताकर बंद करते हुए शासन को रिपोर्ट भेजी थी कि मामले की न्यायिक जांच कराना ठीक रहेगा। जानकार लोगों का मानना है कि पुलिस की तर्ज पर आयोग भी ओरिजनल सीडी मांगेगा और उपलब्ध होने की दशा में जांच के आगे बढ़ने के आसार कम ही होंगे। क्योंकि इस मामले की जांच प्रमुख सचिव ओमप्रकाश भी कर चुके हैं, उसमें भी कुछ नहीं आया और उन्होंने भी ओरिजनल सीडी मांगते फाइल को बंद कर दिया था।
आखिर इरशाद हुसैन ही क्यों
जस्टिस इरशाद हुसैन को स्टिंग की जांच देने के सरकार के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं। करीब दो साल पहले आरक्षण में प्रमोशन के मुद्दे पर हुसैन की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय आयोग बना था, कार्यकाल कई बार बढ़ने के बाद करीब छह माह पहले खत्म भी हो गया, लेकिन रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली। इसके बाद उन्हें लोकायुक्त की सलेक्शन कमेटी में विधिवेत्ता के रूप में भी शामिल कर लिया। इसके बाद उन्हें नारी निकेतन में संवासानियों के शोषण की न्यायिक जांच भी सौंप दी गई। और अब स्टिंग की जांच भी उन्हीं को दिए जाने से सवाल उठना लाजिमी है।
स्टिंग आपरेशन में कब क्या हुआ?
22 जुलाई 2015 : एक संगठन व केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेसवार्ता कर स्टिंग का खुलासा किया
23 जुलाई : प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष ने संयुक्त प्रेसवार्ता बुलाई
24 जुलाई : शाहिद ने पद छोड़ने की इच्छा व्यक्त की, शाम तक कार्यमुक्त हुए
25 जुलाई : भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मिलकर सीबीआई जांच की मांग की, गुजरात सरकार ने शाहिद की उत्तराखंड आने की एनओसी वापस ली, पीएमओ ने शाहिद की उत्तराखंड प्रतिनियुक्ति का आदेश रद्द किया
27 जुलाई : प्रतिनियुक्ति रद्द करने का केंद्र का आदेश राज्य के मुख्य सचिव को मिला
28 जुलाई : राज्य ने केंद्र को फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा
10 अगस्त : केंद्र ने पत्र भेजकर 11 अगस्त तक शाहिद को रिलीव करने को कहा
अक्तूबर माह में मुख्यमंत्री के तत्कालीन प्रमुख सचिव ने इस मामले की न्यायिक जांच कराने की सिफारिश सीएम से की।
17 मार्च 2016 को राज्य कैबिनेट ने इस मामले की न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया