पिछले पांच साल से युवाओं को रोजगार देने की हुंकार भर रही राज्य सरकार के लिए सदन में पेश की गई बजट पुस्तिका ही आईना बन गई। बजट दस्तावेज में स्पष्ट है कि 136 विभागों, आयोगों व निकायों में कुल 84 हजार पद रिक्त पड़े हैं।
ये पद स्थाई व अस्थाई दोनों ही प्रकृति के हैं। दो साल पहले रिक्त पदों की यह संख्या 72 हजार थी, यह आंकड़ा भी दो वर्ष पहले सदन के भीतर रखा गया था।
सदन में पेश किए गए बजटीय दस्तावेज के अनुसार शिक्षा विभाग में सबसे ज्यादा रिक्त पद पड़े हैं। माध्यमिक शिक्षा (नवसृजित) अकेले विभाग में 14929 पद रिक्त पड़े हैं।
इसके अलावा विद्यालयी शिक्षा में 12617 पद रिक्त हैं। प्राविधिक शिक्षा विभाग में 2013 और चिकित्सा लोक स्वास्थ्य विभाग में 3403 पद रिक्त हैं। सरकार ने महिलाओं के लिए खूब बजट दिया, लेकिन महिला सशक्तिकरण विभाग में 7992 पद रिक्त हैं।
सरकार के दावें हर बार खोखले:
उद्योगो को बढ़ावा देने वाले का दावा करने वाली सरकार खुद कर्मचारी बीमा योजना व श्रम चिकित्सा सेवाएं विभाग में 1784 पदों पर भर्ती नहीं कर सकी। जनपद स्तर तक ग्राम्य विकास में 558 पद और औद्योगिक न्यायाधिकरण व श्रम न्यायालय में 614 पद रिक्त हैं। आरईएस जैसे छोटे विभाग में भी 1340 पद रिक्त हैं।
सरकार हर गांव को सड़क से जोड़ने की बात तो करती है, लेकिन गांव को सड़क से जोड़ने वाले विभाग पीडब्लूडी में ही 2366 पद रिक्त हैं। इसके अलावा वानिकी व वन्य जीव के मामले में राज्य के बेहद महत्वपूर्ण व संवेदनशील माना जाता है, और इस विभाग में 2273 पदों पर भर्ती नहीं हुई।
अधिकारियों के पद भी भर्ती के इंतजार में
प्रदेश में विभिन्न विभागों में आयोजनेत्तर श्रेणी के राजपत्रित अफसरों के कुल 4890 पद रिक्त हैं। इनमें श्रेणी क के1230 और श्रेणी ख के3660 पद रिक्त पड़े हैं। योजनागत श्रेणी में रखे जाने वाले भी राजपत्रित व अराजपत्रित अफसरों के 3559 पद रिक्त हैं।
एक पहलू यह भी
यदि वित्त विशेषज्ञों की माने, यदि रिक्त पड़े सभी पदों पर भर्ती कर दी जाए राज्य के वित्तीय हालात बिगड़ जाएंगे। क्योंकि राज्य के पास इतने संसाधन नहीं है कि मौजूदा कर्मियों के साथ नई भर्ती कर दी जाए तो वेतन नहीं मिलेगा और राज्य में वित्तीय संकट जैसा आपातकाल पैदा हो जाएगा।