3-पहाड़ से ही नहीं मैदान से भी हुआ
पलायन आयोग के आंकड़ों की मानें तो लोकसभा सीट में सुविधा संपन्न माने जाने वाले ऊधमसिंहनगर से पांच सालों में 28531 लोग स्थायी रूप से पलायन कर चुके हैं जबकि 307310 लोग अस्थायी रूप से रोजगार के लिए पलायन कर चुके हैं। अस्थायी पलायन से प्रभावित ग्राम पंचायतों की संख्या 6436 है जबकि स्थायी पलायन से प्रभावित ग्राम पंचायतों की संख्या 2067 है। इनमें औद्योगिक शहर कहे जाने वाले रुद्रपुर और काशीपुर भी शामिल हैं। दस सालों में नैनीताल जिले में अस्थायी पलायन करने वालों की संख्या 20710 और स्थायी पलायन करने वालों की संख्या 4803 है।
4-फसल का समय पर नहीं होता किसानोें को भुगतान
ऊधमसिंहनगर को धान का कटोरा कहा जाता है लेकिन किसानों को धान, गेहूं और गन्ने की फसल का समय से भुगतान नहीं होना बड़ी समस्या रहा है। इसे लेकर किसान हाईकोर्ट में याचिका तक दाखिल कर चुके हैं, बावजूद इसके समस्या हल नहीं हुई। धान और गेहूं में एमएसपी की गारंटी का मुद्दा भी लंबे समय से लंबित है। बाजपुर के 20 गांवों का मुद्दा भी इस बार चुनाव में सुर्खियां बनेगा।
मरीजों को डोली का सहारा
भीमताल विधानसभा क्षेत्र के ओखलकांडा ब्लॉक में आज भी कई ऐसे गांव हैं जहां से मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने से पहले आठ से दस किलोमीटर या फिर इससे अधिक दूरी तक डोली अथवा घोड़ों में लाना होता है। यही नहीं गांवों में इलाज की सुविधा न होने के कारण इसके बाद भी उन्हें सौ से डेढ़ सौ किलोमीटर दूर हल्द्वानी या फिर नैनीताल ले जाना होता है।
गहराता पेयजल संकट
बीते दो तीन दशकों में लगातार बढ़ते कंक्रीट के जंगलों ने जनपद के पर्वतीय जिले के प्राकृतिक स्रोतों को लील लिया है। रही सही कसर बाहर से आए उन लोगों ने पूरी कर दी है जिन्होंने अपने होटल और रिजाॅर्ट में ट्यूबवेल खोद दिए, जिसकी वजह से दूरस्थ गांवों में भी अब गर्मियों में लोगों को पानी के लिए परेशान होना पड़ता है।
ये भी हैं कुछ खास मुद्दे
लोकसभा सीट में राष्ट्रीय लॉ विश्वविद्यालय का मुद्दा भी प्रभावी होगा। छह साल पहले उत्तराखंड के लिए मंजूर हुए लॉ विश्वविद्यालय के लिए किच्छा में 26 एकड़ जमीन उच्च शिक्षा विभाग को मिल गई थी, लेकिन सियासी होड़ में इसे डोईवाला ले जाकर शिलान्यास भी कर दिया गया, मामला कोर्ट में लंबित है। वहीं, बदहाल सरकारी स्कूल, हल्द्वानी शहर में आईएसबीटी, चौतरफा जाम का भी मुद्दा है।