फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आने वाला समय पंत विवि के लिए महत्वपूर्ण: डॉ. प्रताप

विज्ञापन
पंतनगर में सभागार का उद्घाटन करते डॉ. वीपीएस अरोरा व कुलपति। - फोटो : RUDRAPUR
विज्ञापन
पंतनगर। जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. तेज प्रताप का कार्यकाल 15 अक्तूबर को पूरा हो रहा है। एक सप्ताह का अवकाश लेने की वजह से शुक्रवार का उनका विवि में अंतिम कार्यदिवस था। संकाय सदस्यों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी।
विज्ञापन

कुलपति ने कहा कि आने वाला समय विवि के लिए चुनौतिपूर्ण होगा। सभी अधिष्ठाताओं व निदेशकों को अपने संसाधनों को सीमित करके चलना होगा। बोले, मेरा तीन साल का वक्त संतुष्टि वाला नहीं रहा, मैं जो करना चाहता था वह नहीं कर पाया। गांधी हॉल सभागार में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. प्रताप ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने पर शिक्षा में काफी बदलाव होंगे। सरकार की मंशा अधिकांश संस्थानों, केंद्रीय विश्वविद्यालयों व राज्य सरकार के विश्वविद्यालयों का निजीकरण करने की है। ऐसे में पंतनगर विवि को बचाने की जिम्मेदारी सभी को लेनी होगी। विवि को 10 हजार छात्रों की क्षमता निर्धारित करनी होगी, जिसमें डिप्लोमा व अन्य व्यवसायिक पाठ्यक्रमों को भी लागू करना होगा। इससे विवि की आय बढ़ेगी। कहा कि केंद्रीय विवि का आदेश कुछ दिनों में होने की संभावना है।
कुलसचिव डा. एके शुक्ला ने कुलपति के बारे में बताया कि उन्होंने किसी भी परिस्थिति में हमेशा मुस्कराना सिखाया है। कृषि का सर्वश्रेष्ठ सम्मान सरदार बल्लभभाई पटेल बेस्ट शिक्षण संस्थान का पुरस्कार पंत विवि को मिलना सबसे बड़ी उपलब्धि रही। वहां पर अधिष्ठाता कृषि डा. शिवेंद्र कश्यप आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन

कुलपति डॉ. तेज प्रताप को मातृशोक
पंतनगर। विवि के कुलपति डॉ. तेज प्रताप की लगभग 96 वर्षीय माता का शुक्रवार सुबह निधन हो गया। जिसके चलते कुलपति आवास में आयोजित होने वाला विदाई प्रीतिभोज निरस्त कर दिया गया। गांधी हाल में आयोजित समारोह के बाद डॉ. प्रताप सीधे अपने गृह जनपद कुल्लू (हिमाचल प्रदेश) के लिए रवाना हो गए। (संवाद)
सीएबीएम में डॉ. वीपीएस अरोरा सभागार का उद्घाटन
पंतनगर। विवि के कृषि व्यवसाय एवं प्रबंधन महाविद्यालय में शुक्रवार को कुलपति डॉ. तेज प्रताप ने महाविद्यालय के नवनिर्मित डॉ. वीपीएस अरोरा सभागार का उद्घाटन किया। महाविद्यालय के संस्थापक एवं पूर्व अधिष्ठाता डॉ. वीपीएस अरोरा ने सभागार का नामकरण उनके नाम पर करने के लिए आशीर्वचन देते हुए महाविद्यालय की स्थापना संबंधी अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान अधिष्ठाता डॉ. आरएस जादौन, प्राध्यापक डॉ. आशुतोष सिंह आदि मौजूद रहे। (संवाद)
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें