एक तरफ जहां सिडकुल के कई कारखानों में श्रमिकों का लगातार हो रहा शोषण है वहीं दूसरी ओर उनकी बीमारी पर भी कमीशन का खेल चल रहा है। श्रमिकों के हितों के लिए बनाया गया कुमाऊं का एकमात्र ईएसआई अस्पताल भी राज्य सरकार की उदासीनता के कारण सिर्फ रेफर सेंटर बनकर रह गया है।
यूएसनगर में पूरे कुमाऊं मंडल का एक मात्र ईएसआई अस्पताल है। यहां पर औद्योगिक संस्थानों के चलते हजारों श्रमिक ईएसआई से जुड़े हैं, लेकिन उन्हें ईएसआई से मिलने वाली सुविधा सिर्फ नाम की है। उद्योगों से ईएसआई के नाम पर प्रतिमाह करोड़ों रुपये का हिसाब किताब चलता है, अब हालात यह हो गए हैं कि इस अस्पताल के जरिए कुछ निजी अस्पतालों ने यहां अपना जाल बिछा दिया है और श्रमिकों के हितों पर इलाज के नाम पर कमीशन का खेल शुरू हो गया है। कुमाऊं का यह ईएसआई अस्पताल आवास विकास कालोनी के जगतपुरा में मात्र तीन कमरों से संचालित हो रहा है। इस अस्पताल में प्रतिदिन 400 से लेकर 600 ओपीडी होती है, यहां पर डाक्टरों की कमी के कारण मरीज की शुगर और प्रेगनेंसी की जांच के अलावा कोई जांच या अन्य सुविधा नहीं है। यहां पर एक मात्र स्थायी और दो अस्थायी डाक्टरों के भरोसे यह अस्पताल चल रहा है। पंतनगर सिडकुल में हजारों श्रमिकों में से यहां मरीजों का लगातार आना होता है इसलिए यहां से मरीज को सीधे हल्द्वानी के निजी अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। इस बारे में अस्पताल के डा. ललित सिंह ने बताया कि स्टाफ की कमी के कारण यहां पर दो जांचों के अलावा अन्य कोई सुविधा नहीं है। इसलिए मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है।