गढ़ीनेगी में ग्रामसभा की खुली बैठक में भाग लेते अधिकारी व ग्रामीण।
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गढ़ीनेगी को नगरपंचायत का दर्जा देेने का प्रस्ताव ग्राम सभा की खुली बैठक में पारित नहीं हो सका। बैठक में मौजूद अधिक ग्रामीणों ने एक राय से गढ़ीनेगी का ग्राम पंचायत का दर्जा बरकरार रखने पर सहमति जताई। इससे गढ़ीनेगी को नगरपंचायत बनाए जाने की सीएम की घोषणा अधर में लटक सकती है। खुली बैठक का पारित प्रस्ताव एसडीएम के माध्यम से जिला मुख्यालय को भेजा जाएगा।
कुंडा थाना क्षेत्र की भरतपुर न्याय पंचायत के 19 गांव काशीपुर तहसील का हिस्सा बन चुके हैं। इसके बाद कुछ लोग गढ़ीनेगी को नगर पंचायत का दर्जा दिए जाने की मांग उठा रहे थे। यहां के मतदाता 3600 से अधिक हैं और रामजीवनपुर मझरे को मिलाकर जनसंख्या दस हजार से अधिक है। 30 नवंबर को जसपुर आए सीएम पुष्कर सिंह धामी ने गढ़ीनेगी को नगरपंचायत का दर्जा देने की घोषणा की थी। सीएम की घोषणा के बाद इस मुद्दे पर गढ़ीनेगी के लोग दो गुटों में बंट गए थे। एक गुट ग्राम पंचायत का दर्जा बरकरार रखने के पक्ष में है, तो दूसरा गुट गढ़ीनेगी को नगरपंचायत बनाने का पक्षधर है।
सीएम की घोषणा को ध्यान में रखते हुए तहसील की रिपोर्ट के आधार पर शनिवार को गढ़ीनेगी के पंचायत घर में खुली बैठक बुलाई गई। बैठक में काफी संख्या में ग्रामीणों ने शिरकत की। बैठक में जसपुर के एडीओ राजेश कुमार यादव, ग्राम सचिव इसरार अहमद, प्रधान अंशिका रानी, उप प्रधान अमित ढीगंरा आदि मौजूद रहे।
शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसओ कुुंडा समेत बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स मौजूद रहा। गढ़ीनेगी को नगरपंचायत का दर्जा देने के संबंध में ग्रामीणों से राय मांगी गई। 85 प्रतिशत से अधिक ग्रामीणों ने गढ़ीनेगी को नगरपंचायत बनाने के प्रस्ताव का विरोध किया। एसडीओ राजेश ने बताया कि खुली बैठक में पारित प्रस्ताव एसडीएम काशीपुर के माध्यम से डीएम कार्यालय को भेजा जाएगा।