चंपावत
- जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी दीप्तकीर्ति तिवारी के मुताबिक चंपावत जिले के 675 गांवों में से 27 गांव जनशून्य। उत्तराखंड बनने से पहले 23 गांव आबादीहीन थे।
- 11 गांवों की आबादी दस से भी कम है। इन गांवों में ज्यादातर उम्रदराज लोग हैं।- तीन विकासखंडों के 39 गांवों में मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना के तहत 224.26 लाख रुपये से कार्य गतिमान।
चंपावत जिले के ये गांव हैं जनशून्य
ढुंगाजोशी मल्ला, पटआंगड़, जाख, बगजीवाला, सुरकोट, रूदेली, जडिय़ाकंद, मौन, सिमलक, बुंगामारा, खाटखुटम, बनतड़ी, चमौला, बेस्टानौला, स्यूर, बलरूनीमहर, तल्लानयाबाद, चौरी, चंचलपुर, ध्यानभंडारी, क्वैराला, गिरी पुनेठी, खर्रागूंठ, कालीदुर्गा बगौटी, सालगूंठ, सम्यूगूंठ और कमस्यून।
नैनीताल
- जिले के 22 गांव जनशून्य हो गए हैं। जिले में स्थायी तौर पर 4823 और 20,951 लोगों ने अस्थायी तौर पर पलायन किया है।
गांवों से सबसे अधिक पलायन सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में हुआ है। -डॉ.पीतांबर अवस्थी, समाजशास्त्री जंगली जानवरों ने खेती चौपट की तो रोजगार के साधन खत्म हो गए। रोजगार की तलाश में गांव छोड़ शहरों का रुख किया तो नगर में घर बनाकर बसना पड़ा।
- नंद किशोर कांडपाल, दरमान, हवालबाग।
ऊधमसिंह नगर
- स्थायी पलायन का सबसे कम प्रभाव यूएस नगर जिले में हुआ है।
- अस्थायी पलायन में जिला आठवें स्थान पर है।
- पलायन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक जिले की 191 ग्राम पंचायतों में 19,583 - व्यक्तियों ने साढ़े चार साल में अस्थायी पलायन किया है।
- सबसे अधिक खटीमा की 49 ग्राम पंचायतों में 5192 व्यक्तियों व सबसे कम - जसपुर की 18 ग्राम पंचायतों में 419 व्यक्तियों ने अस्थायी रूप से पलायन किया है।
- दो ग्राम पंचायतों में 82 व्यक्तियों ने 4.5 सालों में स्थायी पलायन किया है।
- सबसे अधिक ब्लॉक रुद्रपुर की एक ग्राम पंचायत के 70 व्यक्तियों व सबसे कम काशीपुर की एक ग्राम पंचायत में 12 व्यक्तियों ने स्थायी रूप से पलायन किया है।
पलायन की मुख्य बजह मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। गांव में पेयजल की दिक्कत थी। जंगली जानवरों के आतंक से खेती छोड़नी पड़ी। अब भी मूलभूत सुविधाओं का विस्तार और जंगली जानवरों से मुक्ति मिले तो फिर से वीरान गांव आबाद हो सकते हैं।
- कैलाश मेहरा, नैनोली, हवालबाग।
बागेश्वर
- जिले में 73 गांव जनशून्य हो गए हैं। इनमें कई तो राज्य गठन से पहले ही आबादी विहीन हो गए थे।
- जिला विकास अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार 19 ग्राम पंचायतों के 34 राजस्व गांवों में 50 प्रतिशत से अधिक पलायन हुआ है।
इन गांवों से पलायन
भतौड़ा, ठांगा रौतेला, भड़ात, ऐरारी, फयालडोब, बसकूना, तोली, फरसाली पल्ली, छारसिंग, पांकड़, बटालगांव, मल्ला पन्याली (बड़ी पन्याली), अखट, चोखट (चोरखट), ओखलधार, जैंसर, ढुकरा, हुनेरा, नरग्वाड़ी, तल्ला डोबा, मल्ला डोबा, लौबांज, भोजगढ़, नौधर स्टेट, डुमलोट, अयारतोली, मोनियाभ्योल, बैगांवकालरो, रियूनीलखमार, पैय्या तल्ला, पैय्या मल्ला, वज्यूला, नौगांव अठरो, कोट्यूड़ा।