भारत और नेपाल की दोस्ती के प्रतीक के रूप में बनने जा रहे मैत्री गेट का निर्माण बजट के अभाव में अधर में लटक गया है। खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास बनने जा रहे इस गेट के लिए बजट कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग को नहीं मिल सका है। बताया जा रहा है कि कारण खर्च न हो पाने से धनराशि लैप्स हो गई है।
सीमांत क्षेत्र खटीमा से नेपाल के बीच आवाजाही के लिए कोई विधिवत घोषित रास्ता नहीं हैं। इस समस्या को देखते हुए साल 2022 से मेलाघाट के पास मैत्री गेट बनाने की तैयारी चल रही है। तब विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के चलते निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका था। मैत्री गेट के निर्माण कार्य के लिए लोक निर्माण विभाग को कार्यदायी संस्था बनाया गया था। बताया जा रहा है कि इसका शासनादेश संस्कृति विभाग को जारी हुआ। करीब 72.43 लाख का बजट भी मिला था। उधर, लोनिवि के एई पीपी तिवारी ने बताया कि एक साल से भी अधिक समय से बजट कार्यदायी संस्था को हस्तांतरित नहीं हो सका था।
जंगल के रास्तों से नेपाल को हो रही आवाजाही
सीमांत क्षेत्र खटीमा से नेपाल जाने के लिए घोषित रास्ता न होने के कारण लोग जंगल व चोर रास्तों से नेपाल को जाते हैं। इस कारण तस्करी की भी आशंका रहती है। नेपाल जाने के लिए लोग बनबसा या टनकपुर (चंपावत) के रास्ते से जाते हैं। खटीमा में नगला तराई गांव से लोग सनिया नाले को पार करके अथवा घने जंगलों के बीच से लोग नेपाल को जाते हैं।
अपनी-अपनी बात
खटीमा में मैत्री गेट के निर्माण के लिए बजट जिला प्रशासन के खाते में आया था। हमारे स्तर से बजट को रोका नहीं गया था।
मैत्री गेट के लिए धनराशि वित्तीय वर्ष 2022-2023 के आखिर में मिली थी और अपेक्षित धनराशि से थोड़ी कम थी जिस कारण खर्च न हो पाने से धनराशि लैप्स हो गई थी। कार्यदायी संस्था ने दोबारा डीपीआर बनाकर भेजी है। मैत्री गेट मुख्यमंत्री की घोषणा में भी शामिल है जिसे जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
-मनीष कुमार, सीडीओ, यूएस नगर