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लैंडयूज चेंज के मामले में खटीमा तहसील भी शक के दायरे में

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एनएच 74 भूमि अधिग्रहण में कृषि भूमि को कॉमर्शियल दिखाकर करोड़ों का मुआवजा हड़पने के मामले में कुमाऊं आयुक्त द्वारा जांच की जा रही है। खटीमा तहसील में भी कृषि भूमि को व्यावसायिक (143) करने के कई मामले हैं। इसमें मुआवजा हड़पने के लिए किए गए मामलों की जांच चल रही है। स्थानीय प्रशासन अपने सभी अभिलेखों की पड़ताल में जुटा है।

सितारगंज से टनकपुर तक सड़क के चौड़ीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। इसमें नानकसागर से चकरपुर तक का क्षेत्र खटीमा तहसील के अंतर्गत आता है। इस मार्ग पर नानकसागर से पहेनिया बाइपास तक लोगों को भूमि अधिग्रहण का  मुआवजा दिया जा चुका है। इसमें से कितने लोगों को कृषि भूमि को व्यावसायिक दिखाकर लाभ पहुंचाकर इसकी जांच के दायरे में है। बाइपास के आगे थारु गैर थारु भूमि विवाद होने के कारण यहां किसी को मुआवजा नहीं दिया गया है, लेकिन इस बीच में किसानों द्वार भूमि को 143 किए जाने की जांच की जा रही है।
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तहसील पहले भी कृषि भूमि को व्यावसायिक कर रजिस्ट्री बेनामे के मामले में सुर्खियों में रही है। यहां ऐसे भी मामले बताए जाते हैं, जिनमें एक ही दिन में 20 से 30 जमीन की फाइलों में लैंडयूज चेंज किया गया है। तहसील का आलम यह रहा है कि 143 न करने वाले अधिकारियों का यहां कुछ ही दिन में स्थानांतरण करवा दिया जाता था। इस तरह के मामले जांच के दायरे में हैं या नहीं इसके बारे में कोई भी अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है। कुमाऊं आयुक्त डी सेंथिल पांडियन द्वारा कृषि भूमि को व्यावसायिक करने के मामले की जांच से यहां खलबली मची है।
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