पंतनगर में अनुबंध के दौरान मौजूद कुलपति व अन्य अधिकारी।
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पंतनगर। इंडिया यंग वाटर प्रोफेशनल प्रोग्राम एंगेज्ड ट्रेनिंग एंड लर्निंग मॉडल पर आधारित है। इस कार्यक्रम के पहले चरण में भारत के 20 युवा इंजीनियरों को दोनों देशों के चयनित 25 संस्थान पानी की गुणवत्ता, संरक्षण और दूषित जल को शुद्ध कर प्रयोग में लाने के लिए प्रशिक्षित करेंगे। प्रशिक्षित युवा विभिन्न क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए कार्य करेंगे।
जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय स्थित प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में इंडिया यंग वाटर प्रोफेशनल प्रोग्राम का पहला संस्करण ऑनलाइन लांच किया गया। प्राध्यापक डॉ. एचजे शिव प्रसाद ने बताया कि भारत का ऑस्ट्रेलिया के साथ जल संरक्षण पर अनुबंध है, जिसके तहत दोनों देशों के बीच विशेषज्ञों की निगरानी में विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
इसी कड़ी में इंडिया यंग वाटर प्रोफेशनल प्रोग्राम की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया-भारत के बीच जल संबंधों में मील का पत्थर साबित होगी। यह कार्यक्रम भविष्य के जल नेताओं को तैयार करना चाहता है। कार्यक्रम ऑस्ट्रेलिया इंडिया वाटर सेंटर (ऑस्ट्रेलियाई और भारतीय विश्वविद्यालयों का एक संघ) की ओर से क्रियान्वित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत ऑस्ट्रेलिया के 10 व भारत के 15 कुल 25 विश्वविद्यालयों का चयन किया गया है।
इस प्रोग्राम के तहत जल पेशेवरों को आवश्यक कौशल, ज्ञान, व्यवहार और नेटवर्क से लैस करना है, जो उन्हें भारत में जल संसाधनों के विकास और प्रबंधन में योगदान करने में सक्षम बनाएगा। पहले संस्करण के लिए 20 प्रतिभागियों का चयन राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना की केंद्रीय और राज्य कार्यान्वयन एजेंसियों से किया गया है। पंतनगर विवि भारत के चयनित 15 संस्थानों में से एक है। सोमवार को कार्यक्रम की लांचिंग में विवि की डीन टेक्नोलॉजी प्रो. अलकनंदा अशोक, सिविल इंजीनियरिंग के प्रो. एचजे शिव प्रसाद, प्रो. ज्योति प्रसाद, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के डॉ. रवि सक्सेना, पर्यावरण विज्ञान के प्रो. आरके श्रीवास्तव आदि लोगों ने ऑनलाईन शिरकत कर अपने विचार रखे।