भावना जोशी, मुख्य उद्यान अधिकारी।
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रुद्रपुर। परंपरागत खेती में लगातार बढ़ रही लागत के कारण तराई में अमरूद की बागवानी के प्रति किसानों का रूझान बढ़ रहा है। जिले में एक साल में अमरूद का रकबा करीब 600 हेक्टेयर बढ़ गया है।
गेहूं और धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी की मांग उठाने के बावजूद किसानों को अपने अनाज का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है। इस कारण किसानों का बागवानी का तरफ रूझान बढ़ रहा है। खासकर जिले में अमरूद की बागवानी का रकबा एक साल में ही 600 हेक्टेयर यानी 1500 एकड़ बढ़ गया है। वर्ष 2019-20 में ऊधमसिंह नगर में 1400 हेक्टेयर रकबे में अमरूद की बागवानी हो रही थी, जबकि वर्तमान में यह रकबा 2000 हेक्टेयर यानी 5000 एकड़ पहुंच गया है। अमरूद के अच्छे भाव और बेहतर उत्पादन के चलते इसकी भागवानी किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है।
तराई की मिट्टी और जलवायु भी अमरूद की बागवानी के लिए मुफीद है। जिले में अमरूद के साथ ही आम, लीची आदि की भी बागवानी है, लेकिन अमरूद की बागवानी सुविधाजनक होने के कारण किसानों को रूझान इसकी तरफ अधिक बढ़ रहा है। जिले में अमरूद की एल-49 व गोल्डन प्रजातियों की काफी डिमांड है। इन अमरूदों की मांग देशभर में रहती है। किसानों का अमरूद का भाव 60 से 100 रुपये प्रति किलो हाथों-हाथ मिल जाने से काफी सुविधा होती है। जबकि अन्य फसलों के लिए उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ता है।
जिले में किसानों का अमरूद की बागवानी के प्रति रूझान तेजी से बढ़ा है। एक साल के भीतर ही अमरूद की बागवानी का करीब 400 हेक्टेयर रकबा बढ़ चुका है। किसानों को आम की बागवानी के लिए प्रोत्साहित भी किया जा रहा है।
भावना जोशी, मुख्य उद्यान अधिकारी।