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पंतनगर में वैश्विक खाद्य सुरक्षा केंद्र स्थापित करने की कवायद

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पंत विवि पंतनगर में आयोजित कार्यशाला में पहुंचे देश और विदेश के वैज्ञानिक। संवाद - फोटो : RUDRAPUR
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पंतनगर। जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में वैश्विक खाद्य सुरक्षा केंद्र (जीएफएससी) की स्थापना की जाएगी। विवि के अनुसंधान निदेशालय की ओर से शनिवार को आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला के आयोजन में फ्रांस के नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट फार एग्रीकल्चर, फूड एंड इन्वायरमेंट के वैज्ञानिकों डॉ. सर्जे सावरी व डॉ. लातिसिया विल्लोके सहित अंतरराष्ट्रीय चावल शोध संस्थान मनिला (फिलिपींस) के सलाहकार डॉ. यूएस सिंह ने विवि के गौरवमयी इतिहास व हरित क्रांति में योगदान को देखते हुए पंतनगर में ही जीएफएससी की स्थापना पर जोर दिया।
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जैव नियंत्रण प्रयोगशाला सभागार में आयोजित कार्यशाला में निदेशक शोध डॉ. एएस नैन ने कहा कि 21वीं सदी में खाद्यान्न सुरक्षा एक महत्वपूर्ण चुनौती है, क्योंकि विश्व की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है। इसके लिए खाद्यान्न सुरक्षा कर पाना कठिन है। इस चुनौती का सामना करने के लिए पंतनगर में प्रस्तावित जीएफएससी मील का पत्थर साबित होगा। फ्रांस से आए वैज्ञानिक डॉ. सावरी ने इस प्रस्तावित केंद्र के स्वरूप का खाका प्रस्तुत करते हुए सभागार में मौजूद वैज्ञानिकों से सुझाव आमंत्रित किए। कहा कि प्रस्तावित केंद्र में अमेरिका, फ्रांस, यूके, अफ्रीका, ब्राजील जैसे देशों के वैज्ञानिक सहयोग देंगे। पंत विवि व अन्य संस्थानों के छात्रों को इस केंद्र से विशेष रूप से लाभ मिलेगा। छात्र अंतरराष्ट्रीय ख्याति के वैज्ञानिकों के साथ शोध कर सकेंगे।
फ्रांस की महिला वैज्ञानिक डॉ. लातिसिया ने खाद्यान्न सुरक्षा में पादप रोग विज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला। कहा कि खाद्य सुरक्षा के लिए जरूरी है कि पादप रोगों की समय रहते पहचान कर उसका प्रभावी निदान कर लिया जाए और इस कार्य में सिमुलेशन मॉडल से पूर्वानुमान का प्रयोग हो।
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फिलीपींस के प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. सिंह ने कहा कि उनका केंद्र पंत विवि के साथ मिलकर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसका मुख्य उद्देश्य चावल आधारित कृषि खाद्यान्न सिस्टम से विश्व के लोगों को खाद्यान्न और पोषक तत्वों की सुरक्षा उपलब्ध कराना है। पादप रोग विज्ञान की ईमेरिट्स प्रोफेसर डॉ. करूणा विशुनावत ने कहा कि खाद्य सुरक्षा को लेकर संचालित योजनाओं से सामंजस्य बनाकर प्रस्तावित केंद्र को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। सीबीएसएच के पूर्व अधिष्ठाता डॉ. जीके गर्ग ने प्रस्तावित केंद्र के प्रभावी संचालन के लिए उच्च स्तरीय समिति के गठन पर बल दिया।
निदेशक प्रसार डॉ. एके शर्मा ने कहा कि केंद्र की सफलता के लिए सघन प्रयासों की जरूरत होगी। अधिष्ठाता गृह विज्ञान डॉ. अल्का गोयल ने महिलाओं व बच्चों के लिए खाद्य एवं पोषण सुरक्षा की जोरदार वकालत की। कार्यक्रम का संचालन व धन्यवाद ज्ञापन संयुक्त निदेशक शोध डॉ. केपी सिंह ने किया। इस दौरान पर्यावरण विभागाध्यक्ष डॉ. आरके श्रीवास्तव, जैव प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष डॉ. एके गौड़, डॉ. एनके सिंह, डॉ. जेपी जायसवाल, डॉ. अनुराधा दत्ता, डॉ. सुभाष चंद्रा, डॉ. अनिल चहल, डॉ. एमएस नेगी ने भी विचार प्रस्तुत किए। कार्यशाला में 45 से अधिक वैज्ञानिकों ने प्रतिभाग किया।
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